बूबू और उनके बर्मा के किस्से
आज हम अपने पहाड़ों की खूबसूरती, ताजी हवा, शुद्ध पानी, संपदा व संस्कृति का गुणगान करते नहीं थकते. यह सब हमें ऐसे ही नहीं मिला है. हमारे पहाड़ों को बचाने के लिए हमारे बड़बाज्यू, बूबू, आमा, काक... Read more
शतरंज के खिलाड़ी
वाजिदअली शाह का समय था. लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था. छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, सभी विलासिता में डूबे हुए थे. कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था , तो कोई अफीम की पीनक ही के मजे लेता था.... Read more
बादलों में भवाली: भवाली की जड़ों को टटोलती किताब
अंग्रेजी वर्तनी के अनुसार भोवाली, अतीत में भुवाली और अब भवाली नाम से जाना जाने वाला यह छोटा सा कस्बा नैनीताल से 11 किमी पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग 109 (पूर्व में हाईवे 87 के नाम से) पर स्थ... Read more
उत्तराखंड : आगम और व्यय की कदमताल
कहते हैं कि कविताओं में बड़ी धार होती है. उत्तराखंड के भाबर तराई और पहाड़ के लिए किये जाने वाले खर्च का ब्यौरा देता 2022-23 का बजट आखिर में गाता चलता है अटल जी की कविता, “कदम मिला कर च... Read more
फिल्मों में उत्तराखण्ड की अभिनेत्रियाँ
अपनी खूबसूरत वादियों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाने वाला उत्तराखण्ड पहाड़ी लोगों की मोहित कर देने वाली नैसर्गिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है. थियेटर, टेलीविजन और फिल्मों की दुनिया में उत... Read more
टांडा फिटबाल किलब और पेले का बड़ा भाई
यह किस्सा अशोक पांडे के उपन्यास लप्पूझन्ना का एक हिस्सा है. आम आदमी के जीवन और उसकी क्षुद्रता के महिमागान पर आधारित उपन्यास लप्पूझन्ना यहां से खरीदें: लप्पूझन्ना हिमालय टॉकीज से लगे खेल मैदा... Read more
सयानी बुआ : कहानी
-मन्नू भंडारी सब पर मानो बुआजी का व्यक्तित्व हावी है. सारा काम वहाँ इतनी व्यवस्था से होता जैसे सब मशीनें हों, जो कायदे में बँधीं, बिना रुकावट अपना काम किए चली जा रही हैं. ठीक पाँच बजे सब लोग... Read more
चांद और चकोर के प्रेम की कहानी: लोककथा
चांद और चकोर के प्रेम की कहानी किसने न सुनी होगी. दुनिया में जहां प्रेम का बात होगी वहां चांद और चकोर को खूब याद किया जायेगा. दुनिया भर में चांद और चकोर के प्रेम की खूब कहानियां कही जाती हैं... Read more
आउट ऑफ सिलेबस
कभी-कभी ज़िंदगी में अपने जैसे किसी अन्य व्यक्ति से मुलाकात हो जाये तो बड़ी कठिनाई उत्पन्न हो जाती है. आज सुबह छोटी बुआ के बेटे से फोन पर बात हुई. “अनिमेष कैसे हो?” मैंने पूछा. “ठीक हूँ दादा.... Read more
पिछली कड़ी यहां पढ़ें: छिपलाकोट अन्तर्यात्रा: मुड़ मुड़ के न देख “ऊपर गाड़ी में सामान किसका है, रस्सी से बंधा”? बिल्कुल पैक हो गई रोडवेज की सुबह सात बजे नैनीताल से पिथौरागढ़ चलन... Read more


























