अब तो पहाड़ में घर ही कम बचे हैं. बचे हुये घरों में भी बुजुर्ग दम्पति अधिक हैं या फिर ऐसे लोग जिनको आधुनिक समाज में पिछड़े और मजबूर कहा जाता है. कमजोर और मजबूर कहे जाने वाले इन कन्धों ने ही... Read more
आज बिरुड़ पंचमी है
ईश्वर का भी मानवीकरण लोक परम्पराओं की सबसे ख़ास बात होती है. लोक परम्पराओं में ईश्वर होता तो परमशक्तिशाली है पर लोगों से उसका पारिवारिक रिश्ता रहता है. उत्तराखंड की लोक परम्पराओं में इसे सहज... Read more
कुमाऊं-गढ़वाल से आजादी की लड़ाई की दुर्लभ तस्वीरें
भारत के स्वाधीनता संग्राम में कुमाऊँ-गढ़वाल का बड़ा योगदान रहा था. कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में इस पर्वतीय क्षेत्र के चप्पे-चप्पे में राष्ट्रभक्ति की लहर दौड़ गयी थी और यहाँ के अनेक नेता रा... Read more
बिश्नु : पहाड़ की कहानी
‘होई नाती जा पै आपण ख्याल करिये मेरी चिन्ता झन करिये भेटण हूँ कै औने रयै, आपण बाप रन्कर जस झन करिये’ कहते हुऐ बुढ़िया आमा; दादी के आँसू टपक पड़े जिन्हें वो रोकने का प्रयास वह कर रही थी. ‘हिट... Read more
उत्तराखंड की सड़कों पर बॉबी कटारिया की दादागिरी
बीते 28 जुलाई को बॉबी कटारिया नाम के एक व्यक्ति ने अपने फेसबुक पेज पर रील शेयर की. इस रील में बॉबी कटारिया बीच सड़क में कुर्सी और मेज लगाकर शराब का जाम बना रहे हैं. रील में गाना चल रहा है-(B... Read more
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 के सिंगल्स फाइनल में भारत के बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन का मुकाबला मलेशिया के त्जे यंग से था. मलेशिया के त्जे यंग ने सबको अचंभित करते हुये लक्ष्य सेन को पहला सेट हरा दिया... Read more
ऐसे होती है पारम्परिक कुमाऊनी शादी
सादगी भरा जीवन जीने वाले पहाड़ी बाहर से जितने भोले दिखते हैं भीतर से उतने ही रंगीले भी हैं. तो यही वजह है कि उत्तराखण्ड के किसी न किसी कोने में हर रोज कोई न कोई उत्सव या मेला चल ही रहा होता... Read more
सावन के आखिरी सोमवार पर जागेश्वर धाम की तस्वीरें
समुद्र तल से 1,870 मी की ऊंचाई पर स्थित जागेश्वर मंदिर समूह का जिक्र स्कन्द पुराण के मानस खण्ड में भी है. अल्मोड़ा शहर से 37 किमी की दूरी पर स्थित जागेश्वर मंदिर समूह में कत्यूरीकाल, उत्तर क... Read more
चमोली जिले के हेलंग से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है उत्तराखंड के पंचकेदार में पाँचवाँ केदार- कल्पेश्वर. उर्गम घाटी में स्थित कल्पेश्वर मंदिर समुद्र तल से लगभग 2134 मीटर की ऊँचाई पर स... Read more
अब तो जैसे संगज्यु और मित्ज्यु जैसे शब्द पहाड़ियों के बीच से गायब ही हो गये हैं. कुमाऊनियों के बीच प्रचलित दोस्ती की यह अनूठी परम्परा अब महज किस्सों का हिस्सा रह गयी है. पिछले दशक तक तो गाँव... Read more


























