अंकिता हत्याकांड की सीबीआई जांच क्यों नहीं?
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा है कि अंकिता हत्याकांड में बार-बार जिस वीआईपी का नाम आ रहा है उसका खुलासा होना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो घटना की सीबीआई जांच... Read more
उत्तराखंड के अल्मोड़ा की पहचान के कई आयाम हैं, पहाड़ों में बसा ये प्राचीनतम शहर आधुनिकता को अपनाने में भी पीछे नहीं है पर जो चीज अल्मोड़ा को अनूठा बनाती है वो है यहां के लोगों का अपनी संस्कृ... Read more
पेड़-पौधों से बतियाने वाला अद्भुत है ये शख्स
बूढ़े हो चुके अपने जिंदा शरीर के लगभग साठेक किलो वजन को साथ लिए वो हर पल कहीं न कहीं धरती के सीने में चारेक दशक से चौड़ीदार वृक्षों को रोपने में लगे रहते हैं. इसके साथ ही सूख रहे नौलों, धारो... Read more
सबकी अपनी जीवन कहानी होती है और सबका अपना संघर्ष होता है, सबके अपने सौभाग्य और सफलताएं होती हैं, तो अवरोध और असफलताएं भी. फिर भी हर जीवन अपने जमाने से प्रभावित होता है. अनेक जीवन अपने जमाने... Read more
अंकिता हत्याकांड पर टिप्पणी करने वाले आरएसएस नेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज पुलिस तलाश में जुटी
अंकिता हत्याकांड पर छिछली टिप्पणी करने वाले आरएसएस नेता विपिन कर्णवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. सीओ ऋषिकेश डीसी ढौंडियाल ने जानकारी दी है- “अंकिता हत्याकांड को लेकर सोशल मीड... Read more
उत्तराखंड की हल्द्वानी जेल पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है. चर्चा में आने कारण कोई आपराधिक घटना या किसी आरोपी का फरार होना नहीं है बल्कि जेल टूरिज्म जैसी एक व्यवस्था की शुरुआत करने जैस... Read more
वेशभूषा से किसी भी इलाके के स्थानीय निवासियों की पहचान होती है. ये वेशभूषाएं पारंपरिक तौर पर पीढ़ी-दर-पीढ़ी पहनी जाती हैं. ये पारंपरिक परिधान औए वेशभूषाएं कैसी होंगी यह कई बातों से तय होता ह... Read more
पहाड़ी मूली नहीं है मामूली
‘किस खेत की मूली’ (कमजोर या अधिकारविहीन, ‘मूली-गाजर समझना’ (कमजोर) और ‘खाली मूली में’ (व्यर्थ में) जैसी लोकोक्तियां अथवा वाक्यांश यह सिद्ध करने के लिए पर्याप्त हैं कि मूली को बेहद मामूली, कम... Read more
‘चिड़ी की दुक्की’ अजब है यह कहानी
नाम तो उनका अब्दुल हई था मगर दिलवालियाँ उन्हें प्यार से ‘हाय’ कहा करती थीं. वो थे भी सर से पाँव तक एक हसीन और दिलचस्प हाय. सोने की तरह दमकता रंग, सूरज की किरनों को शरमा देने वाले... Read more
स्कूल में कॉलेज के लड़कों और महिलाओं के जुलूस के जत्थे आने की धुंधली तस्वीरें याद हैं. दूर से आती नारों की गूंज या जनगीतों की आवाजों का मतलब हमारे लिये स्कूल की छुट्टी से ज्यादा कुछ नहीं था.... Read more


























