जोशीमठ की पूरी कहानी
गढ़वाल हिमालय का गजेटियर लिखने वाले अंग्रेज़ आईसीएस अफसर एचजी वॉल्टन ने 1910 के जिस जोशीमठ का ज़िक्र किया है, वह थोड़े से मकानों, रैनबसेरों, मंदिरों और चौरस पत्थरों से बनाए गए नगर चौक वाला ए... Read more
बड़े से लॉन में उगायी गयी अमेरिकन घास के बीच-बीच में उग आयी चलमोड़िया घास की जड़ें खोदने में खड़क सिंह इस कदर मशगूल था कि उसे बहुत देर तक झुलसाती हुई धूप का अहसास ही नहीं हुआ. सूरज की किरणें... Read more
एक समय ऐसा भी था जब हिन्दी फिल्मों में पहाड़ी लोकगीतों की धुनों का इस्तेमाल किया जाता था. आज की पीढ़ी को यह बात एक तरह की गप्प लगेगी. वैसे मोबाइल में दुनिया खोजने वाली इस पीढ़ी को तो बुजुर्ग... Read more
टनकपुर किताब कौथिग का दूसरा दिन
पिछली कड़ी- टनकपुर किताब कौथिग का पहला दिन टनकपुर किताब कौथिग का दूसरा दिन यानी 25 दिसंबर 2022 की सुबह बड़ी सुहावनी थी. सच कहूं तो उत्सुकतावश नींद ही नहीं आई क्योंकि उस सुबह हमें जाना था वन्य... Read more
राजा-पीलू की जोड़ी
पिछली कड़ी – स्कूल की पाटी और भाई-बहन की मीठी नोक-झोंक प्राप्ति-प्रियम गाड़ी में पीछे बैठे हुए हैं और हम लोगों को नवनीत जी सरप्राइज़ विजिट पर चकराता यात्रा पर लेकर जा रहे हैं. मैं नवनीत... Read more
उतरैणी कौतिक बागेश्वर की तस्वीरें
हिमालय के आंगन उत्तराखंड में मेलों और त्यौहारों की समृद्ध परम्परा है और यहां के निवासी सदियों से चली आ रही अपनी परंपराओं और मान्यताओं को बड़े हर्षोल्लास के साथ इन मेलों और त्यौहारों के माध्य... Read more
घरों में आदमी नहीं अब दरारें हैं
धरती फट रही है. दरारें पड़ रही हैं. घरों के अंदर, बाहर, आंगन, सड़कें, खेत-खलिहान दीवारें, पुश्ते, सड़कें, रास्ते सब दरक रहे हैं. पुरानी दरारें चौड़ी हो रही हैं, सब कुछ निगलने को हैं दरारें.... Read more
धारचूला से आई एक खबर ने खुश कर दिया
अनेक शताब्दियों से कुमाऊँ की नेपाल और तिब्बत सीमा से लगी इस धारचूला तहसील की व्यांस, चौंदास और दारमा घाटियों में रं समाज की बसासत है. परम्परागत रूप से व्यापार करने वाला यह समाज हमारे इलाके क... Read more
अस्सी पार कर चुके हैं लोहनी जी. टनकपुर में उनका घर ढूंढने में कोई देर न लगी. सड़क पर एक बुजुर्ग व्यक्ति से उनके घर की गली जानने के लिए मैंने अपने साथी से कहा तो सड़क से जा रहीं चार महिलाओं म... Read more
सुनें घुघुतिया का गीत
यूट्यूब चैनल ‘केदारनाद’ कुमाऊँ के लोक पर्व उत्तरायणी के मौके पर लाया है एक बेहतरीन लोकगीत. गीत के बोल हैं ‘ओ काले कौआ.’ गौरतलब है कि कुमाऊनी लोकसंगीत को रिक्रिएट करने... Read more


























