अमेरिकी सेना ने आखिरकार पाकिस्तान को दी जाने वाली 300 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद को रोकने का फैसला ले लिया है. पाकिस्तान में बनी इमरान खान की नई सरकार को पहला तगड़ा झटका लगा है.अमेरिकी मिलिटर... Read more
गंगोत्री ग्लेशियर हर साल 12 मीटर पीछे खिसक रहा
गंगोत्री ग्लेशियर, हिमालय क्षेत्र के सबसे बड़े ग्लेशियरों में से एक है. इस ग्लेशियर की मात्रा 27 घन किमी. है और इसकी लंबाई और चौड़ाई लगभग क्रमश: 30 और 4 किमी. है. यह ग्लेशियर चारो तरफ से... Read more
‘न्याय की हत्या’ पर विधि आयोग की रिपोर्ट
2017 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बबलू चौहान बनाम दिल्ली सरकार मामले में निर्णय देते हुए निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ अनुचित मुकदमा चलाने पर चिंता व्यक्त की थी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने अनुचित तर... Read more
उत्तराखंड में 7 से 8 अक्टूबर 2018 को इन्वेस्टमेंट समिट होगी. देहरादून में होने वाले समिट में राज्य सरकार 20 हजार करोड़ रुपए का इन्वेस्टमेंट आने की उम्मीद कर रही है. राज्य सरकार द्वारा देश विद... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 5
अमित श्रीवास्तव उत्तराखण्ड के पुलिस महकमे में काम करने वाले वाले अमित श्रीवास्तव फिलहाल हल्द्वानी में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं. 6 जुलाई 1978 को जौनपुर में जन्मे अमित के गद्य की शैली... Read more
माइकल चाचा का मर्म
ललित मोहन रयाल उत्तराखण्ड सरकार की प्रशासनिक सेवा में कार्यरत ललित मोहन रयाल का लेखन अपनी चुटीली भाषा और पैनी निगाह के लिए जाना जाता है. 2018 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘खड़कमाफी की स्मृत... Read more
पहाड़ियों के लिए दिशाएँ सिर्फ दो होती हैं
होती होंगी दिशाएँ चार, आठ या दस. हम पहाड़ियों के लिए दिशाएँ होती हैं सिर्फ दो – ऊपर और नीचे. यूँ तो मुख्य दिशाएँ चार मानी जाती हैं पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण. इनके अतिरिक्त इन दिशाओं स... Read more
उत्तराखंड के जख्म हरे कर गयी यह उड़ान
योगेश भट्ट देहरादून में रहते हैं. योगेश उत्तराखंड के वरिष्ठ पत्रकारों में शामिल हैं. वर्तमान में दैनिक उत्तराखंड में कार्यरत हैं. देहरादून हवाई अड्डे से स्पाइस जेट के विमान ने जब बायो फ्यूल... Read more
मॉरिशस में युवाओं को हिंदी में आनंदित होते देखा
सविता तिवारी स्वतंत्र पत्रकार, मॉरीशस विश्व हिन्दी सम्मेलन में जाने का यह मेरा पहला मौका था. लोगों की बातें, उम्मीदों और अपेक्षाओं को थोड़ी देर के लिए अलग कर दिया जाए तो मुझे निजी रूप से इस... Read more
जन्माष्टमी पर विशेष: नज़ीर अकबराबादी की नज़्म “यारो सुनो ये ब्रज के लुटैया का बालपन”
आज से कोई तीन सौ बरस पहले आगरे में एक बड़े शायर हुए नज़ीर अकबराबादी. नज़ीर अकबराबादी साहब (१७४०-१८३०) उर्दू में नज़्म लिखने वाले पहले कवि माने जाते हैं. समाज की हर छोटी-बड़ी ख़ूबी नज़ीर साहब के यहा... Read more


























