घर वाली दीपावली और निबंध वाली दीपावली
हमारी शिक्षा की गोभी सबसे पहले हमारी स्कूली शिक्षा से खुदती है. स्कूल में पढाई 80 प्रतिशत व्याहारिक बातें गलत होती हैं. हमें कक्षा तीन से दीपावली पर निबंध पर इंक पैन घिसना सिखाया गया अंग्रेज... Read more
पीहू की कहानियाँ – 2
जब लगा कि अब पीहू नहीं बन सकती … कहानी और पीहू दोनों मिल चुकी थी. प्रोड्यूसर मिलना बाक़ी था. एक और बेहद मुश्किल काम. मुंबई में अलग अलग स्टूडियोज़ और प्रोड्यूसर से मिलना – बात करन... Read more
लौंडे-लबारों की बरात में सयाने बूढ़े की होशियारी
छी भै ये बूढ़े लोग भी न, बहुत तंग कर देते हैं. जब कुछ काम नहीं कर सकते तो आराम से खाएं, पियें एक जगह में बैठे रहें. जब देखो सारे घर में घूम घूम के ये करो, वो करो, ऐसे करो, वैसे करो. इस काम को... Read more
प्रेम पिता का दिखाई नहीं देता
चन्द्रकान्त देवताले 7 नवंबर 1936 को जौलखेड़ा, बैतूल (मध्य प्रदेश) में जन्मे चन्द्रकांत देवताले समकालीन हिन्दी कविता के सबसे बड़े हस्ताक्षरों में से थे. उन्होंने अपने कार्य के लिए साहित... Read more
विषय से ज्यादा कठिन शिक्षक
गणित से लड़के दूर- दूर भागते थे. इस पर अफसोस इस बात का था कि, भविष्य के बेहतर मौके, केवल इसी विषय में मौजूद बताए जाते थे. ‘अगर गणित के साथ अच्छे दर्जे में पास हो जाएँ’ तो, अनेक क... Read more
अनुवाद पढ़कर बनता है गंभीर और स्थायी पाठक भारत जैसे महादेश में जितनी भाषाएं बोली जाती हैं, उन्हें देखते हुए कोई भी अनुमान लगा सकता है कि यहाँ के लोग कितनी तो भाषाएँ जानते होंगे. मगर वास्तविकत... Read more
डमास्कस में किस्मत के सितारे आज कुछ बुलंद लग रहे थे. लिफ्ट के लिए हमें इंतजार नहीं करना पड़ा. 25’००० सीरियन पाउण्ड की एक चमचमाती नई कार में हमें शीध्र ही लिफ्ट मिल गई. 100 से 120 किमी प... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 14
पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से लगातार रचनाएं करते थे. वे नैनीताल के प्रतिष्ठित विद्यालय बिड़ला विद्या मंदिर में... Read more
हमें अदाएँ दीवाली की ज़ोर भाती हैं
आज से कोई तीन सौ बरस पहले आगरे में एक बड़े शायर हुए नज़ीर अकबराबादी. नज़ीर अकबराबादी साहब (1740-1830) उर्दू में नज़्म लिखने वाले पहले कवि माने जाते हैं. समाज की हर छोटी-बड़ी ख़ूबी नज़ीर साहब के यहा... Read more
अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 5
गुडी गुडी डेज़ अमित श्रीवास्तव हीरामन उवाच ‘गुडी गुडी मुहल्ले की निवर्तमान सामाजिकी चार आप्त वाक्यों से मिलकर बनी थी,’ कहता हीरामन, ‘इन्हें ही लोकतंत्र के चार मजबूत स्तम्भ भी कहा जा सकत... Read more


























