साधो हम बासी उस देस के – 5 -ब्रजभूषण पाण्डेय (पिछली कड़ी : बार्क मतलब खाली भौंकना नहीं होता उर्फ़ कैस्केडिंग इफ़ेक्ट की बारीकियां) जमुना परसाद उन दोनों को फ़ुल इग्नोर मारते हुए अपनी चेयर पर रूल... Read more
शताब्दी का खिलाड़ी
1984 में लास एन्जेल्स में हुए ओलिम्पिक खेल सिर्फ़ एक एथलीट की उपलब्धियों के लिये याद किये जाते हैं. कार्ल लुईस के हालिया प्रदर्शन ने सारे खेल-संसार में यह उम्मीद जगा दी थी कि वे 1936 के बर्लि... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 52
वर्तमान में इलैकट्रानिक मीडिया के कई चैनल काम करने लगे हैं. समाचार पत्रों के प्रकाशन की भी बाढ़ सी आ गई है और यह काम आधुनिक टैक्नालॉजी के प्रवेश से आसान भी होता जा रहा है. पत्रकारिता में व्यव... Read more
वह कैसे मीटू कैम्पैन में कैसे हिस्सा ले?
और मेरे सामने पहाड़ की एक युवा पत्रकार चली गई -इस्लाम हुसैन महिला उत्पीड़न के प्रति मुखर होकर मीटू कैम्पैन चलाने वाली महिलाओं की आपबीती पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं हैं. महिलाओं द्वारा इज्जत दांव... Read more
भारतीय विवाह एंथम सांग ‘जूली-जूली’
जनरेटर की भट-भटाट के आगे किसी भी प्रकार का रसास्वादन न मिल पाने के कारण दूल्हे के भाई के दोस्त पैरों को लाश की तरह घसीटते चल रहे हैं. अगले दस मीटर में अंधेरा छाया है. इस अंधेरे में पचास से प... Read more
मौर्यकाल के दौरान उत्तराखण्ड की स्थिति
उत्तराखंड का इतिहास भाग – 7 मौर्यकाल के साहित्यिक और पुरातत्विक स्त्रोत मिल जाने के कारण वर्त्तमान उत्तराखण्ड क्षेत्र का एक स्पष्ट इतिहास सामने आता है. मौर्यकाल के दौरान वर्तमान उत्तराखण्ड क... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 50
पिथौरागढ़ में रहने वाले बसंत कुमार भट्ट सत्तर और अस्सी के दशक में राष्ट्रीय समाचारपत्रों में ऋतुराज के उपनाम से लगातार रचनाएं करते थे. वे नैनीताल के प्रतिष्ठित विद्यालय बिड़ला विद्या मं... Read more
देओ टिब्बा का ट्रेक
हिमांचल प्रदेश में स्थित देओ टिब्बा चोटी की समुद्रतल से ऊँचाई 6001 मीटर है. इस चोटी में समिट करना काफी तकनीकी है. इस ट्रेक की शुरूआत मनाली से होती है. मैं सुबह ही मनाली से ट्रेक के लिये निकल... Read more
बचपन के बहाने
हमारे कनिष्ठ पुत्र चिरंजीव नचिकेता, ढाई बरस के हैं. वे रोज रात को सोने से पहले जिद करते हैं. उनकी बालहठ रहती है, यूट्यूब पर फिल्मी गाने देखने की. घर पर टेलीविजन अथवा एलसीडी स्क्रीन जैसे साधन... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 51
यह 15 अगस्त 1978 का दिन था. एकाएक मैंने उसे अपने सामने खड़ा पाया, एक ग्राहक के रूप में. मै बैठने का आग्रह करूं, उससे पहले ही वह बोला, ‘‘अखबार छापना है’’. एक छोटा छापाखाना किसी दूसरे का अखबार... Read more


























