कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 98
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
26 जनवरी 1950 को भारत सुबह 10:18 बजे एक गणराज्य बन गया. उसके कुछ मिनट बाद, सुबह 10:24 बजे डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करवाई गई थी. देखिये भारत के पहले... Read more
हल्के-फुल्के मिजाज की फिल्म चश्मेबद्दूर
चश्मेबद्दूर (Chashme Buddoor) एक पर्सियन शब्द है, जिसका शाब्दिक अर्थ है- बुरी नजर से दूर या नजर ना लगे. चश्मे बद्दूर (1981) दिल्ली विश्वविद्यालय के तीन दोस्तों की कहानी है, जो रूम शेयरिंग कर... Read more
नैनीताल के अनूप साह को पद्मश्री पुरुस्कार
आधुनिक नैनीताल के निर्माताओं में शुमार दशकों तक नैनीताल की शिक्षा, उद्यम, पर्यटन और पर्वतारोहण के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नैनीताल की मोमबत्ती और मौन पालन उद्योग को नई ऊंचाइया... Read more
ओए नागरिक… अमाँ बाशिंदे… अबे देसवासी जियो… बसो… फलो तुम्हारी भेजी चिट्ठी मिली. चलो इस ज़माने में भी चिट्ठी पत्री बची हुई है चाहे जिस भी रूप में हो. तुम तो बेटा स्लैंग... Read more
संविधान सभा (constitutional assembly) की पहली बैठक 9 दिसम्बर, 1946 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन हॉल, जिसे अब संसद भवन के केंद्रीय कक्ष के नाम से जाना जाता है, में हुई. पहली पंक्ति में जवाह... Read more
कुमाऊनी लोकोक्तियाँ – 97
डा. वासुदेव शरण अग्रवाल ने एक जगह लिखा है – “लोकोक्तियाँ मानवीय ज्ञान के चोखे और चुभते सूत्र हैं.” यदि वृहद हिंदी कोश का सन्दर्भ लिया जाए तो उस में लोकोक्ति की परिभाषा इस प्रकार दी गई... Read more
चराग़-ए-राह बुझा क्या कि रहनुमा भी गया हवा के साथ मुसाफ़िर का नक़्श-ए-पा भी गया – परवीन शाक़िर -‘सर आई हैव स्टडीड ऑलमोस्ट एव्री एस्पेक्ट ऑफ वीमेन एम्पावरमेंट एंड आई फील कम्फर्टेबल... Read more
उत्तराखण्ड के अरबपति दान सिंह ‘मालदार’ की कहानी
दान सिंह बिष्ट ‘मालदार’ (Dan Singh Bisht ‘Maldar’) (1906 -10 सितंबर 1964) दान सिंह बिष्ट उर्फ़ दान सिंह ‘मालदार’ (Dan Singh Maldar) उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल के अरबपति... Read more
उत्तराखंड में बीज बचाओ आन्दोलन
80 के दशक तक उत्तराखंड के पहाड़ों में भी हरित क्रान्ति ने जोर पकड़ लिया था. पहाड़ों में सरकारी व कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हरित क्रांति की रासायनिक खेती का प्रचार-प्रसार किया. लोगों... Read more


























