गौलापार में दिग्गजों के बीच यूं ही नहीं चमका रवि
सफलता की कहानी यूं ही नहीं लिखी जाती. ईमानदारी से किए गए संघर्ष और कड़ी मेहनत ही सफलता की कहानी बयां कर देती है. आजकल राजनीति जिस दौर में पहुंच गई है, वहां केवल पहुंच, रसूख व धन का ही बोलबा... Read more
आजकल पहाड़ों में ही नहीं देश-विदेश में “फ्वां बाघा रे” गीत की बहुत चर्चा है. यह गीत इतिहास की एक असली कथा पर आधारित है. यह कथा एक ऐसे खूंखार बाघ की है जिसने आज से कोई सौ बरस पहले पिछली... Read more
होशियारी की मिसाल होते हैं. इंग्लैण्ड-अमेरिका में. विश्वास न हो तो उनके साहित्यकोश की तलाशी ले लो. एज़ वाइज़ एज़ एन आउल, आपको जरूर मिल जाएगा. गांधीनुमा गोल चश्मे पहना शख़्स इन अंग्रेजों को आ... Read more
कहां गया हमारे पहाड़ का चुआ
अब तो भूले-बिसरे ही याद आता है हमें रामदाना. उपवास के लिए लोग इसके लड्डू और पट्टी खोजते हैं. पहले इसकी खेती का भी खूब प्रचलन था. बचपन में मंडुवे यानी कोदों के खेतों के बीच-बीच में चटख लाल, स... Read more
[हाल में नैनीताल के बीरभट्टी के समीप हुए हादसे में दिवंगत हुए पुलिसकर्मियों को लेकर सोशल मीडिया के कुछ हिस्सों में जिस तरह की टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं वे विचलित करने वाली थ... Read more
मसाण, आंचरी, खबीस और ऐड़ी : कुमाऊं-गढ़वाल में निवास करने वाली पारलौकिक शक्तियां
मृत्यु के बाद आदमी कहां जाता है? इस प्रश्न ने मानव सभ्यता को हजारों सालों से असमंजस में डाला है. दुनिया भर में होने वाले अलग-अलग और अनूठे मृत-संस्कार और उनकी जटिल बारीकियां और विवरण इस बात क... Read more
जब से हमने होश संभाला, कुमांऊनी का गाना – ‘चैकोटकि पारबती तीलै धारू बोला बली, तीलै धारू बोला’ अथवा ‘ओ लाली हो लाली हौंसिंया, बसन्ती लाली तीलै धारू बोला’ जैसे गीत सुनते आये हैं. अब तो रोचक बन... Read more
भातरोजखान के थानाध्यक्ष नीरज भाकुनी की अपील पर अपने मृत साथियों का जिम्मा स्वयं उठाया उत्तराखंड पुलिसकर्मियों ने
2 दिन पूर्व हुई सड़क दुर्घटना में मारे गए सिपाही ललित मोहन व नंदन सिंह की मृत्यु के उपरांत थाना अध्यक्ष नीरज भाकुनी द्वारा की गई थी लोगों से अपील जिसमें उत्तराखंड पुलिस के जवानों द्वारा बढ़-... Read more
मारे गए पुलिसवालों के परिवारों को क्राउड फंडिंग के सहारे छोड़ देना क्या खुद सरकार की बदनामी नहीं है
एक उपन्यास की यह पंक्तियां हैं – “पुलिस कर्मचारी की एक हसरत रहती है कि वह सम्मान से जिए और बराबरी से मर सके” (Policemen Dying on Duty Should be Properly Compensated) यह दोनों हसर... Read more
गंगोलीहाट की डॉ. सविता जोशी जो गुड़गांव में गेरु और बिस्वार से ऐपण बना कर देश और दुनिया में अपनी संस्कृति को लोकप्रिय बना रही हैं
ऐपण हमारी परवरिश का एक हिस्सा रहा है जो बाद में केवल महिलाओं और लड़कियों तक सीमित रह गया. ऐपण का मतलब है लीपना. लीप शब्द का अर्थ है अंगुलियों से रंगने से है. गेरु की पृष्ठभूमि पर बिस्वार अथवा... Read more


























