नीचे के कपड़े : अमृता प्रीतम
जिसके मन की पीड़ा को लेकर मैंने कहानी लिखी थी ‘नीचे के कपड़े’ उसका नाम भूल गई हूं. कहानी में सही नाम लिखना नहीं था, और उससे एक बार ही मुलाक़ात हुई थी, इसलिए नाम भी याद से उतर गया है… (... Read more
रबिंद्रनाथ टैगोर की कहानी: तोता
एक था तोता. वह बड़ा मूर्ख था. गाता तो था, पर शास्त्र नहीं पढ़ता था. उछलता था, फुदकता था, उड़ता था, पर यह नहीं जानता था कि क़ायदा-क़ानून किसे कहते हैं. (Rabindranath Tagores Story Tota) राजा... Read more
यम और नचिकेता की कथा
ये कहानी है कठोपनिषद की ! इसके अनुसार ऋषि वाज्श्र्वा, जो कि परम ज्ञानी थे, ने विश्वजीत यज्ञ किया. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस यज्ञ के पूर्ण हो जाने पर, जीवन में किसी तरह का दुःख या विषाद... Read more
अप्रैल 2024 की चोपता-तुंगनाथ यात्रा के संस्मरण
-कमल कुमार जोशी समुद्र-सतह से 12,073 फुट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ को संसार में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित शिव मंदिर बताया जाता है. चोपता अत्यधिक घने जंगलों, मखमली घास के बुग्यालों और हिमालय की... Read more
1980 के दशक में पिथौरागढ़ महाविद्यालय के जूलॉजी विभाग में प्रवक्ता रहे पूरन चंद्र जोशी. लम्बे कद के शांत मृदुभाषी, होठों पर सहज मुस्कान, दिखाई भी कम ही देते या तो क्लास में होते और या फिर प्... Read more
कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड राज्य में स्थित है और यह एक प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थल है. यह मंदिर गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग जिले में है. यह स्थान भगवान कार्तिक (भगवान शिव के जेष्ठ पुत्र)... Read more
‘पत्थर और पानी’ एक यात्री की बचपन की ओर यात्रा
‘जोहार में भारत के आखिरी गांव मिलम ने निकट आकर मुझे पहले यह अहसास दिया कि जैसे बस्ती और सभ्यता के चिन्हृ उससे आगे नहीं होंगे. आगे मनुष्य नहीं होंगे…लेकिन चेतना तुरंत इस मनःस्थिति से अल... Read more
पहाड़ में बसंत और एक सर्वहारा पेड़ की कथा व्यथा
वनस्पति जगत के वर्गीकरण में बॉहीन भाइयों (गास्पर्ड और जोहान्न बॉहीन) के उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए लीनियस जैसे जीनियस ने पादपों के एक कुल को इन भाइयों के नाम पर बॉहुनिया नाम दिया. यह कुल... Read more
पर्यावरण का नाश करके दिया पृथ्वी बचाने का संदेश
पृथ्वी दिवस पर विशेष सरकारी महकमा पर्यावरण और पृथ्वी बचाने के संदेश देने के लिए काफी कुछ करता है लेकिन कभी-कभी इनके काम करने का ढंग समझ ही नहीं आता है. पनचक्की चौराहा पर एक पाकड़ का पेड़ लगा... Read more
‘भिटौली’ छापरी से ऑनलाइन तक
पहाड़ों खासकर कुमाऊं में चैत्र माह यानी नववर्ष के पहले महिने बहिन बेटी को भिटौली देने की एक अनूठी परम्परा है जो कि सदियों से चली आ रही है और आज भी बदलते समय में नये कलेवर के साथ मौजूद है.(Bh... Read more


























