उत्तराखण्ड के कई लोगों ने फिल्म, टेलीविजन और फैशन इंडस्ट्री में मुकाम हासिल किया है. देश की सीमाओं से बाहर भी उत्तराखण्ड की महिलाओं ने अपनी खूबसूरती का जादू बिखेरा है. इसी कड़ी में नया नाम ह... Read more
आकाशवाणी के कार्यक्रम उत्तरायण को पहाड़ियों की सांस्कृतिक धड़कन बनाने वाले बंसीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ : पुण्यतिथि विशेष
कोई 30-31 वर्ष तक आकाशवाणी के शॉर्ट वेव 61.48 यानी 4480 किलोहर्ट्ज पर रोज शाम सुदूर पर्वतीय अंचल (उत्तराखण्ड) के श्रोता ठीक शाम 5.45 बजे सुनते थे दो सुपरिचित आवाजें –उत्तरायण का श्रोता... Read more
उत्तराखंड का एक छोटा सा जिला है बागेश्वर. यहां के कांडा तहसील में स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात रही डॉक्टर समीउन्नेसा को लोग उनके समर्पण को गाहे-बगाहे हर हमेशा याद करते रहते हैं. उनके समर्पण भ... Read more
हर मौसम इस पहाड़ी राज्य के लिए अलग तरह की बुरी खबरें लेकर आता है. मानसून की पहली बारिश ने पहाड़ी कस्बे अल्मोड़ा का प्रतीक बन चुके बोगनविलिया के पेड़ को ध्वस्त कर दिया. (Almora Mll Road Bouga... Read more
न जाने पहाड़ के कितने परिवारों की हकीकत है क्षितिज शर्मा की कहानी झोल खाई बल्ली
सर्दी ने थोड़ी राहत दे दी थी. चार दिन से रुक-रुककर बर्फ गिरने के बाद आज कुछ देर को धूप निकल आई थी. एकदम मरियल, पीली-पीली. उसमें हल्की-सी तपन तो थी, पर बर्फ पिघलाने की ताकत बिलकुल नहीं थी.(Jh... Read more
कोरोना संकट के दौरान गांव की ओर लौटने वाले युवाओं की संख्या बढ़ी है. गाँवों में इन दिनों भरा-पूरा माहौल दिखाई दे रहा है. पलायन के कारण दुर्दिन देख रहे गांव में अपने लोगों की यह हरियाली कब तक... Read more
एक लड़की और उसका पति जो सर्प था – कुमाऊनी लोककथा
एक बार एक आदमी की एक पत्नी थी. आदमी उससे नाराज था. उसने खुद से कहा, “अगर मैं एक पत्थर को भी तोडूं तो मुझे दो पत्थर मिलते हैं लेकिन अपनी बीवी से मुझे कुछ नहीं मिलता. वह बेवकूफ और बेकार है.” ऐ... Read more
हर पल संतुलन का नाम है जिंदगी
जीवन हाथों में डंडा पकड़े रस्सी पर संतुलन बनाकर चल रहे नट जैसा है. जैसे रस्सी पर चलते रहने के लिए नट को कभी बाईं ओर, तो कभी दाईं ओर झुकना पड़ता है, वैसे ही जीवन की रस्सी पर संतुलन बनाकर आगे... Read more
प्रेत और उसका बेटा – कुमाऊनी लोककथा
बहुत समय पहले की बात है. एक आदमी की मृत्यु हो गयी. उसका 10-12 साल का एक ही बेटा था. The Ghost and his Son जब उस आदमी के शव को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया जा रहा था, उसके बेटे ने... Read more
तस्मै श्री गुरुवे नमः – गुरु पूर्णिमा पर विशेष
द्रोणाचार्य पहले राजकीय शिक्षक थे. भीष्म पितामह द्वारा नियुक्त. उनसे पहले भी कुछ रहे होंगे पर उनका स्टेटस कैबिनेट दर्जे वाला रहा. द्रोणाचार्य जी मिलिटरी साइंस में नियुक्त थे. थ्योरी का पेपर... Read more


























