पहाड़ में पढ़ाई में बहुत बहुत पहले से आस पास मिलने वाली वनस्पतियों का प्रयोग किया गया. इन्हीं से पाटी कलम दवात का रिश्ता जुड़ा. स्याही बनी. भोज पत्र, ताड़ वृक्ष, बड़ वृक्ष से आगे क... Read more
मुंशी प्रेमचंद जयंती (31 जुलाई) पर विशेष Remembering Munshi Prem Chand on his Anniversary वर्तमान परिदृश्य में यदि नीति- नियन्ताओं की मानें तो भारत कई दृष्टि से मजबूत व ऐतिहासिक फैसले लेने म... Read more
ऐपण उत्तराखण्ड के कुमाऊं मंडल की बहुप्रचलित लोककला है. कुमाऊँ के हर घर की महिलाएं मांगलिक अवसरों पर इसे सदियों से बनाती हैं. कुमाऊँ की हर महिला एक ऐपण आर्टिस्ट है कहा जाए तो गलत नहीं होगा. व... Read more
सन् 1900 ई0 में मसूरी की आबादी साढ़े चौदह हजार से भी अधिक हो गई थी जिसमें से चार हजार से अधिक यूरोपियन थे. इस बढ़ती आबादी के लिये पूर्व में सप्लाई किये जाने वाला पानी पर्याप्त नही था. अक्टूब... Read more
महादेव के वीर गण लटेश्वर का मंदिर
थलकेदार से लगभग 2500 फीट की ढलान पर दुर्गम मार्ग को पार कर लटेश्वर नामक मंदिर आता है. यहाँ पर एक सम्पूर्ण विशाल शिला खण्डित होकर गुफा रूप में परिवर्तित हुई है जहाँ “लाटा” देव की... Read more
अल्मोड़ा से केदारनाथ की एक दिलचस्प यात्रा
7 अक्टूबर 2019 को मैं आपना कैंप खत्म कर ऋषिकेश से अल्मोड़ा के लिए निकल रहा था. कैंप से निकलने तक मेरी यात्रा का रास्ता जो तय था वो ऋषिकेश से हरिद्वार होते हुए अल्मोड़ा आने का था पर कैंप से म... Read more
सावन के महीने शिव और कृष्ण के प्यारे साँप और नाग
साँप-सर्प, नाग-अजगर का नाम सुनते ही बदन में सिहरन और दिमाग में बैठा डर घनीभूत हो जाता है. जानकार कहते हैं कि सर्प तो बड़ा शर्मीला होता है. आदमजात को देखते ही लुकने- छिपने-सरक जाने की जुगाड़... Read more
उन दिनों उत्तराखंड का अल्मोड़ा शहर बहुत फैला हुआ नहीं था. आबादी भी कम थी. यही कोई 35 हजार से कुछ ज्यादा. वर्ष 1568 में अल्मोड़ा शहर बना. कुमाऊं डिविजन का यह शहर अब भी उतना ही खूबसूरत है, जित... Read more
33% महिला आरक्षण की माँग करने वाली पहली महिला. अपनी ही सरकार के खिलाफ 15 दिनों तक आमरण अनशन करने वाली नेत्री. अपने क्षेत्र से हाईस्कूल की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली पहली छात्रा. अपने क्षेत्र... Read more
अमला शंकर खामोशी से इस दुनिया से विदा हो गईं
अपने होने वाले पति यानी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के नर्तक उदयशंकर से हुई पहली मुलाक़ात को याद करते हुए अमला शंकर ने अपने संस्मरण ‘प्रेम का देवता’ में लिखा है:“जिन-जिन कारणों से विदेशी भूमि में... Read more


























