बात 60 के दशक की है जब हम प्राईमरी स्कूल में तख्ती को छोड़कर कापी में लिखने का प्रयास करते-2 पॉंचवी कक्षा यानि तत्कालीन बोर्ड की क्लास में पहुँच चुके थे. तब बोर्ड की परीक्षा केवल विद्यार... Read more
बाहरी राज्यों में लॉकडाउन के दौरान फंसे हुए प्रवासी कामगारों की उत्तराखण्ड समाज के संगठन व संस्थाओं द्वारा यथासंभव मदद की जा रही है. यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर प्रवासी उत्तराखंडियों की मदद... Read more
महान हिमालय का छोटा लेकिन खतरनाक शिकारी चुथरौल : सुरेन्द्र पवार का फोटो निबंध
यलो थ्रोटेड मार्टिन प्रतिदिन शिकार करने वाले जीवों में से एक है जिसे स्थानीय भाषा में चुथरौल भी कहा जाता है. यह जीव 16 साल तक जिन्दा रहता है. पीले और भूरे रंग के इस जीव का भार 1.6 से 5.7 किल... Read more
जवाहर लाल नेहरू अल्मोड़ा जेल में
जवाहरलाल नेहरू (नवंबर 14, 1889 – मई 27, 1964) भारत की आजादी के शिल्पियों में से एक रहे नेहरू के बारे में आजकल एक धारणा फैलाई जा रही है कि ‘नेहरू ने भारत की आजादी के लिए किया ही क्... Read more
शो मोर मज़दूर : उसका बीबी-बच्चा दिखाओ, टूटा घर दिखाओ, पाँव का छाला दिखाओ…
अगर आपको पूर्व करोना काल की कुछ याद हो तब मज़दूर नाम की कोई चिड़िया नहीं हुआ करती थी. होती होगी कहीं, ऊंचे-ऊंचे टावरों के बेसमेंट या तेरहवें माले के अनफिनिश्ड अपार्टमेंट में, मॉल के आसपास की... Read more
भारत समेत पूरी दुनिया जब कोरोना महामारी के असीमित संकट से जूझ रही है और लॉक डाउन ने सारे कामकाज पर ताला लगा दिया है, ऐसे संकट काल में भी पहाड़ी महिलाओं के कदम निरंतर बढ़ रहे हैं. उत्तराखंड क... Read more
पहाड़ और चीटियों वाली बारात
रानीखेत में हाईस्कूल बोर्ड के इम्तहान के बाद मुझे चौखुटिया से मासी वाली रोड पर एक गांव ‘फाली‘ में अपनी छुट्टियां काटने के लिऐ भेज दिया था. ‘फाली‘ में मेरी मौसी रहती है. वहां दिन में कोई साथी... Read more
पूरे भारत में ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ का नारा बुलंद था देश की जनता के नेतृत्व में आज़ादी की अंतिम लड़ाई लड़ी जा रही रही. जब पूरा देश अंग्रेजों के खिलाफ़ लड़ रहा था तब टिहरी रियासत की जनत... Read more
नैनीताल में सवर्णों ने दलित ग्राम प्रधान की गाड़ी पंचर की और दलितों का सामान नहीं उतरने दिया
नैनीताल जिले के विकास खण्ड ओखलकांडा के ग्राम भुमका में अनुसूचित जाति के ग्राम प्रधान को सवर्णों द्वारा दलित उत्पीड़न की रपट वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है. सवर्णों द्वारा ग्राम प्रधान... Read more
तिलाड़ी काण्ड की पृष्ठभूमि तैयार करने वाले जन आन्दोलनों का एक विस्तृत अध्ययन
1803 में गोरखाओं से पराजित होकर राज्य खो देने प्रद्युमन शाह की मृत्यु के बाद 1815 में अंग्रेजों की मदद से राजा सुदर्शन शाह ने गोरखा पर विजयी पाई. लेकिन राज्य का एक बड़ा हिस्सा जो अलकनंदा/गंग... Read more


























