चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
चीड़ के जंगल उत्तराखण्ड के कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में 900 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बहुतायत में पाये जाते हैं. चीड़ के तने व शाखाओं को मुख्य रूप से इमारती ... Read more
‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है
देवी मां उदास है परन्तु परलोक गया पुत्र आज भी यादों में आकर उसको हिम्मत दिला रहा है. मनिला डांडे की देवी को ही नहीं हमारे पूरे समाज को कि – लस्का कमर बांधा, हिम्मत का साथा,फिर... Read more
उत्तराखंड की राजनीति के एक युग का अंत हो गया है. प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूरी (Bhuvan Chandra Khanduri) का... Read more
एक ‘युवा’ एथलीट जिनकी उम्र 92 वर्ष है!
आम तौर पर एक उम्र के बाद व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से अशक्त, बेबस और लाचार हो जाते हैं. लेकिन अल्मोड़ा नगर के निवासी लक्ष्मण सिंह ऐठानी ने 92 वर्ष की उम्र में उत्साहपूर्वक एथलेटिक्स स्पर... Read more
रिंगाल: पहाड़ की बुनावट में छिपा रोजगार और जीवन
पहाड़ों में जीवन हमेशा प्रकृति के साथ जुड़कर चला है. यहाँ जंगल सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं होते, बल्कि लोगों की जरूरतों, परंपराओं और आजीविका का हिस्सा होते हैं. उत्तराखंड के पहाड़ी इ... Read more
हिमालय के गुमनाम नायक की कहानी
इस तस्वीर में आपको दिख रहे हैं “पंडित नैन सिंह रावत” — 19वीं सदी के उन महान भारतीय खोजकर्ताओं में से एक, जिन्हें “पंडित ऑफ पंडित्स” कहा जाता है. क्या आप... Read more
‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा’ दीवान सिंह कनवाल की आवाज़ में ये गीत पहली कुमाऊनी फ़िल्म ‘मेघा आ’ का है. ‘मेघा आ’ फ़िल्म के गीत आज भी एक पीढ़ी को मुंहजबानी याद हैं तो इसक... Read more
बर्बर इतिहास का नाम क्यों ढो रहा है ‘खूनीबढ़’
कोटद्वार में बाबा की दुकान का नाम बदले जाने और बजरंग दल से भिड़ने वाले मोहम्मद दीपक के मामले ने अचानक सियासी तापमान बढ़ा दिया. एआई से बनाई गई तस्वीरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, नेशनल मीडि... Read more
कौन थे पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा ‘लकुलीश’?
पाशुपत संप्रदाय के पुरोधा भगवान लकुलीश को भारतीय शैव परंपरा के विकास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यक्तित्व माना जाता है. वे उस दौर के आचार्य थे, जब शिव की उपासना लोक आस्था से आगे बढ़कर संगठित... Read more
नारायण आश्रम उत्तराखंड के पिथौरागढ़ ज़िले में धारचूला से ऊपर, ऊँचे पहाड़ों और गहरी घाटियों के बीच स्थित है. आज यह स्थान शांति, साधना और अध्ययन के बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है, लेकिन इ... Read more


























