रं महोत्सव 2018 – फोटो निबन्ध
इस बार धारचूला में रं महोत्सव (एजीएम) 2018 का आयोजन किया गया है, जिसमें दारमा, व्यांस, चौदांस के 37 गांवों के लोगों के साथ ही देश-विदेश में सेवाएं दे रहे रं समाज के लोग शिरकत कर रहे हैंं. इस... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 52
वर्तमान में इलैकट्रानिक मीडिया के कई चैनल काम करने लगे हैं. समाचार पत्रों के प्रकाशन की भी बाढ़ सी आ गई है और यह काम आधुनिक टैक्नालॉजी के प्रवेश से आसान भी होता जा रहा है. पत्रकारिता में व्यव... Read more
मौर्यकाल के दौरान उत्तराखण्ड की स्थिति
उत्तराखंड का इतिहास भाग – 7 मौर्यकाल के साहित्यिक और पुरातत्विक स्त्रोत मिल जाने के कारण वर्त्तमान उत्तराखण्ड क्षेत्र का एक स्पष्ट इतिहास सामने आता है. मौर्यकाल के दौरान वर्तमान उत्तराखण्ड क... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 51
यह 15 अगस्त 1978 का दिन था. एकाएक मैंने उसे अपने सामने खड़ा पाया, एक ग्राहक के रूप में. मै बैठने का आग्रह करूं, उससे पहले ही वह बोला, ‘‘अखबार छापना है’’. एक छोटा छापाखाना किसी दूसरे का अखबार... Read more
मुनस्यारी से संगीत की ‘बूंद’
इसी साल बरसात के मौसम की बात है मुनस्यारी को जाने वाली सड़कें पूरे दस दिनों तक बंद थी. आप और हमारे लिये जो जीवन कठिन होता है वह मुनस्यारी के लिये दैनिक जीवन है. हर एक साल बरसात में मुनस्यारी... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने: 50
20 नवम्बर 1977 में गोपाल सिंह भंडारी ने दैनिक के रूप में ‘उत्तर उजाला’ का प्रकाशन हल्द्वानी से शुरू किया. वर्तमान में उनकी पुत्री उषा किरन भंडारी व पुत्र वधु स्नेहलता भंडारी की देख रेख में प... Read more
कुली बेगार आन्दोलन
11 जनवरी 1921 की शक्ति में बदरी दत्त पाण्डे का ‘बेगार उठा लो’ का आह्वान इसी क्रम में था. 1921 के आरम्भ में कुमाऊँ का सामाजिक-राजनैतिक तापमान अपनी पराकाष्ठा पर था. गाँवों- विशेष रूप से समस्त... Read more
पढ़ते हुए लोग सबसे खूबसूरत होते हैं
“इस दुनिया में मैं कहीं भी जाऊं मुझे किताबों में डूबे लोग दीखते हैं. इस बात का कोई मतलब नहीं वे लोग अमीर हों, गरीब हों, बूढ़े हों या जवान – अपनी किताबों में मैंने उन्हें सुकून, आराम, सूचना, म... Read more
हल्द्वानी के इतिहास के विस्मृत पन्ने : 49
हैड़ाखान बाबा की मृत्यु के कुछ ही दिन बाद एक किशोर वय का बाबा हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. इसका कोई पुख्ता सबूत तो नहीं था किन्तु बताया गया कि उसने एक बाबा को पहाड़ी से नीचे गिरा कर... Read more
कुमाऊं में पारम्परिक विवाह प्रथा – 2
(पिछली कड़ी: कुमाऊं अंचल में पारम्परिक विवाह प्रथा – 1) गणेश पूजा. वैवाहिक कार्य बिना किसी बाधा के अच्छी तरह से सम्पन्न हों इस कामना के निमित्त वर व कन्या पक्ष के लोग अपने – अपने... Read more


























