पेंटिंग के माध्यम से आपबीती कहकर मुनस्यारी के नन्हे बच्चों का दुनिया को एक जरूरी संदेश
शाखें रहेंगी तो फूल भी पत्ते भी आयेंगे,ये दिन अगर बुरे हैं तो अच्छे भी आयेंगे (Munsiyari Dhapa Village Children’s Painting) शायद कुछ यूं ही कहना चाह रहे हैं ये कल के नन्हें पौंधे, अपने... Read more
बागेश्वर के खर्कटम्टा गांव से तीन ताम्र शिल्प कारीगरों की बात जो लुप्त होती कला को बचाने में लगे हैं
बागेश्वर जिले के खर्कटम्टा गांव में कभी तांबे से बनने वाले बर्तनों की टन्न… टन्न की गूंज दूर घाटियों में सुनाई पड़ती थी, लेकिन वक्त की मार के चलते ये धुनें अब कम ही सुनाई देती हैं. हांलाकि,... Read more
शालिग मामा जी की शादी (26 अक्टूबर 1967 तारीख मामी जी ने बतायी है) की याद है. बरात तल्ली चामी से नैल गांव (लगभग 10 किमी पैदल) जानी थी. रॉकी (मौसी का लड़का) अर मैंने बरात में जाने का गुपचुप प्ल... Read more
सिलबट्टे (सिल-लौढ़) का उत्तरांचली रसोई में एक विशेष महत्व रहा है. शगुन के एकाकी कार्य हो या रोजमर्रा की जिंदगी में रसोई चलाने के, सिलबट्टा हमारे पुरखों का जूसर, मिक्सर व ग्राईन्डर (थ्री-इन-व... Read more
अल्मोड़े में नंदा देवी मेले की एक्सक्लूसिव तस्वीरें
कोरोना के बीच अल्मोड़ा में आज नंदा देवी का डोला निकाला गया और लोगों की आस्था और विश्वास के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. नन्दादेवी का मेला भाद्रमास की पंचमी में शुरु होता है.(Photos of Nandade... Read more
उत्तराखंड के सुदूर पहाड़ों में जाकर मदद करने वाले मेडिकल के छात्रों से मिलिये
पहाड़ में यात्राओं के दौरान जब आप लौटने को होते हैं तो अक्सर बड़े बुजुर्ग और जवान आपसे एक बात कहते नजर आते हैं कि कोई गोली है दर्द की. आप नहीं जानते हैं उन्हें कौन सी बीमारी है फिर भी जिस ला... Read more
अल्मोड़ा में ग्रीष्म की पीली उदास धुधलाई सन्ध्या की इस वेला में, मैं एकाकी बैठा कसार देवी के शिखर पर और देख रहा हूं सुदुर हिमाच्छादित नन्दादेवी के शिखर को ! थके मादे सूरज को अस्तमुखी कि रणे... Read more
गौरा-महेश्वर की गाथा में गौरा
कुमाऊँ की प्रचलित गौरा-महेश्वर की गाथा में शिव-पार्वती के विवाह में पड़ने वाली बाधाओं से सम्बन्धित आख्यान तथा जनश्रुतियां मिलती हैं. इसमें भारतीय संस्कृति के वैवाहिक आदर्श का चित्रण है. (Gau... Read more
पहाड़ों में सातों-आठों की बहार आ गयी है
भादों की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को कुमाऊं और नेपाल में हर्षोल्लास और श्रृद्धा भक्ति से भरा प्रकृति को समर्पित, उसकी पूजा का त्यौहार मनाया जाता है सातूं आठूं. शिव पार्वती तो हिमालय में ही वास क... Read more
बचपन में हम बच्चों की एक तमन्ना बलवान रहती थी कि गांव की बारात में हम भी किसी तरह बाराती बनकर घुस जायें. हमें मालूम रहता था कि बड़े हमको बारात में ले नहीं जायेंगे. पर बच्चे भी उस्तादों के उस... Read more


























