हल्द्वानी में नाट्य प्रस्तुतियों ने बाँधा समां
सर्द मौसम में ‘इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल,’ काठगोदाम के हॉल के माहौल में तपिश का अहसास था. इस गर्मी की वजह थी वे नाट्य प्रस्तुतियां जिन्हें नन्हे और युवा कलाकार अंजाम दे रहे थे. कलाकार... Read more
7वीं तक पढ़े ढोल वादक सोहन लाल को डी.लिट की उपाधि
हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध ढोल वादक सोहन लाल को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट) की उपाधि से नवाजा. ढोल वादक सोहन लाल के संगीत की थाप देश ही नहीं विद... Read more
आजकल मनाया जा रहा है मंगसीर बग्वाल
दीपावली के ठीक एक माह बाद जो दीपावली आती है उसका नाम है मंगसीर बग्वाल. इसे उत्तराखण्ड के गढ़वाल क्षेत्र में सम्पूर्ण जनपद उत्तरकाशी, रवाईं जौनपुर, देहरादून जौनसार क्षेत्र टिहरी के थाती, कठू... Read more
कुमाऊनी भाषा में एक लोकप्रिय लोककथा
भौत पैलिये बात छु. एक गौं में एक बुड़ और एक बुड़ी रौंछी. उ द्वियनै में हइ-निहई कजी लागिये रोनेर भै. नानतिन उनर क्वे छी नै. एक चेलि छी वीक ले भौत पैली ब्या है गोछी.(Folklore in Kumaoni Langua... Read more
नदी-पुत्र : पिथौरागढ़ की एक लोककथा
पीपल पलवृक्ष के नीचे ढोल रख धरमदास ने अंगौछे से पसीना पोछा और गोरी नदी की ओर मुँह कर एक चौड़े पाथर पर बैठ गया. कैलास-मानसरोवर की दुर्गम यात्रा की थकान के स्थान पर एक बहुत बड़ी उपलब्धि का आनन... Read more
कुमाऊं की सबसे लोकप्रिय ‘लोककथा’
बड़ी पुरानी बात है. एक गांव में एक बुड्ढा और बुढ़िया रहा करते थे. ज़िन्दगी के तीन-तिहाई साथ बिताने के बाद भी दोनों के बीच ख़ूब लड़ाई-झगड़ा हुआ करता. बच्चे उनके थे नहीं एक बेटी थी जिसकी सालों... Read more
लोक कथा : कुएं की परियां
एक गांव में एक सुस्त और कामचोर आदमी रहता था. काम-धाम तो वह कोई करता न था, हां बातें बनाने में बड़ा माहिर था. इसलिए लोग उसे शेखचिल्ली कहकर पुकारते थे. शेखचिल्ली के घर की हालत इतनी खराब थी कि... Read more
उत्तराखण्ड में लोकविश्वास
“मामा आ गए-मामा आ गए,” चहकती हुई शारदा माँ के पास आई. माँ बोली, “मैं ना कहती थी, कोई मेहमान आने वाला है. आज सुबह से मुंडेर पर बैठ कौआ काँव-काँव किए जा रहा है.” (Folk... Read more
नेगीदा की वसंत नायिका
काव्य कला का सौष्ठव उसके सब कुछ कह देने में नहीं, बल्कि, अनकहे अंश में है. जैसे अपने पति का नाम न लेने वाली कोई ग्रामीण-नायिका, पति के बारे में पूछे जाने पर हल्के-से मुस्कुरा दे, और नैनो के... Read more
चालक बनढ़ाडु की कहानी- कुमाऊनी लोककथा
एकबार एक चालाक बनढ़ाडु दूध के बर्तन में मुंडी डालकर दूध पी रहा था. अचानक घर के मालिक के आने की आवाज़ सुनकर बनढ़ाडु ने हड़बड़ी में मुंडी बाहर निकालनी चाही पर वह तो बर्तन के अंदर ही फस गयी थी.... Read more


























