हिमालयी लोककथा: राक्षसी का पतन
नेपाल के जुमला जिले के जाईरा नामक गांव में सरकी देव प्रकट हुए थे. यहां एक गाय हर एक शाम को चमकीले पत्थर पर अपना दूध अर्पित करती थी. जब उस गाय के क्रोधित चरवाहे ने क्रोधवश उस चमकीले पत्थर पर... Read more
काली कुमाऊँ के गुमदेश की चैतोल
सोर घाटी, पिथौरागढ़ के अलावा काली कुमाऊँ के गुमदेश में भी चैतोल का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है. गुमदेश की चैतोल सोर की चैतोल से कुछ भिन्नता लिए हुए होती है. अष्टमी के दिन घर भर की साफ़-सफाई,... Read more
एक था फ्रेडी मरकरी
आज से सत्ताईस साल पहले आज ही के दिन यानी ईस्टर, 20 अप्रैल 1992 को लन्दन के वेम्बली स्टेडियम में एक यादगार संगीत आयोजन (Freddie Mercury Concert 1992) हुआ था. फ्रेडी मरकरी ट्रिब्यूट कंसर्ट फॉर... Read more
तिदांग गाँव के रंचिम ह्या की कहानी
सबसे पहले तिदांग ग्राम में रंचिम ह्या रहते थे. वे एक शक्तिशाली, पराक्रमी, प्रभावशाली व धनुर्धर महापुरुष थे. उनके एक अति सुन्दर हष्ट-पुष्ट एकलौता पुत्र था जिन्हें मंगला ह्या के नाम से जाना जा... Read more
उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल में चैत्र नवरात्र में मनाया जाने वाला त्यौहार है चैतोल. मुख्यतः पिथौरागढ़, चम्पावत जिलों के विभिन्न हिस्सों में मनाये जाने वाले इस त्यौहार के स्वरूप में स्थान के अनु... Read more
गबला देव: हिमालय की सौका जनजाति के आराध्यदेव
हिमालय के सौका आदिवासियों के अराध्यदेव.. जै हया दंतो गबला सै-जय हय दंत गर्बीला देव.. —डूंगर सिंह ढ़करियाल ‘हिमरज’ हिन्दू पुराण के अनुसार हिमालय धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष का दाता है. हिमालय स्वयं ना... Read more
पार्वती की ख़ुशी है फुल्यारी की संग्रांद
हे! बीरा फूफू, हे! बीरा फूफू, हे! बैरी (बहरी,) हे! सुनती है कि नहीं, मैं अपनी छज्जा के किनारे तब तक धै (आवाज) लगाती रही, जब तक ऊपर वाले खोले से ऊऊऊ नहीं सुनाई दिया. झट यहाँ आ बहुत जरूरी काम... Read more
Seven Horses in a Forest
हिंदी में पढ़िये – हिमालयी लोककथा: सात सुन्दर घोड़े Thousand of years ago in Tibet, an ancient religion thrived around the mountain known to some as Kang Tise and to others as Kailas or... Read more
हिमालयी लोककथा: सात सुन्दर घोड़े
Read in English:Seven Horses in a Forest हजारों वर्षां पहले तिब्बत में पर्वत के चारों ओर, जिसे कुछ तिब्बती लोग, कांग तिसे और दूसरे कैलास या कांग रिपोचे के नाम से जानते थे, एक प्राचीन धर्म ते... Read more
स्याल्दे बिखौती मेला आज से शुरू
पाली पछाऊँ की सांस्कृतिक विरासत उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति की धरोहर द्वाराहाट का स्याल्दे बिखौती का मेला पाली पछाऊँ में आयोजित होता है. चैत्र मास की अन्तिम रात्रि ‘विषुवत्’ संक्रान्ति की रात... Read more


























