नास्तिक : कुमाऊनी लोककथा
एक व्यक्ति ने एक सन्यासी से तीन सवाल पूछे. (kumaoni folklore Ivan Minayev) पहला सवाल था — आप ऐसा क्यों कहते हैं कि परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है. मुझे तो वह दिखाई नहीं देता है. मुझे दिखाओ कि प... Read more
क़ीमती सलाह : कुमाऊनी लोककथा
एक अमीर आदमी के दो बेटे थे, जब वे बड़े हुए तब उसने दोनों को अपना व्यापार शुरू करने के लिये चार हज़ार रुपए दिए. बड़ा बेटा व्यापार करने चल दिया लेकिन छोटे बेटे ने उन रुपयों से एक जानेमाने फ़क़... Read more
संत राम और आनंदी देवी की जोड़ी में उत्तराखण्ड का लोक संगीत बसता है कहना बिलकुल गलत नहीं होगा. इस सुरीले दंपत्ति का ताल्लुक उत्तराखण्ड के शिल्पकार समाज की उस उपजाति से है गीत-संगीत जिनकी धमनि... Read more
लोककथा : धौन पानी का भूत
धौन पानी क्षेत्र के एक गांव में तीन लोग रहते थे — सास, ससुर और बहू. सास और ससुर बहु के साथ बहुत बुरा व्यवहार किया करते थे. इस गांव में पीने के पानी की बहुत किल्लत थी. इस वजह से पानी लाने के... Read more
उत्तराखंड की लोककथा : फूलों की घाटी
हिमालय पर्वत की घाटी में एक ऋषि रहते थे. बर्फ सी सफेद पकी दाढ़ी वाले ऋषि कंद, मूल, फल खाते हुए तपस्या करते रहते. भगवान् में रमा उनका मन हमेशा प्रसन्न व् स्थिर रहता लेकिन कभी-कभी बर्फ से ढंके... Read more
उत्तराखंड की लोक-कथा: बीरा बैण
सालों पहले उत्तराखण्ड के जंगल में एक बुढ़िया रहती थी. उस विधवा बुढ़िया के सात बेटे थे और एक सुंदर बेटी. परी जैसी सुंदर बेटी का नाम था बीरा. जैसा कि नियति में बदा था, बुढ़िया की मृत्यु हो गई.... Read more
उत्तराखण्ड की लोककथा : ब्रह्मकमल
बहुत समय पहले की बात है. कहते हैं कि उस समय परी लोक की परियाँ धरती पर आती थीं. यहाँ दिनभर विचरण करती थीं और रात का अँधेरा होने के पहले वापस चली जाती थीं. परियों को धरती की स्वच्छ-साफ पानी की... Read more
उत्तराखण्ड की लोककथा : अजुआ बफौल
जमाने पुरानी बात है. पंच देवता का मन हुआ कि हिमालय की यात्रा की जाये. सो पंचदेव पर्वतराज हिमालय की यात्रा पर चल पड़े. हिमालय के सम्मोहन में बंधे वे लगातार चलते ही जा रहे थे. जब वे थक गए तो व... Read more
उत्तराखण्ड की लोककथा : गाय, बछड़ा और बाघ
एक गांव में गाय अपने बछड़े के साथ रहती थी. बछड़े को घर छोड़ गाय रोज हरी घास चरने जंगल जाया करती थी जिससे बछड़े को उसका दूध मिलता रहे. (Folklore of Uttarakhand) बछड़े को और ज्यादा पौष्टिक दूध... Read more
लोककथा : मुर्दे के साथ ब्याह
नियति जैसे अभागी रुकमा से रूठी थी. रुकमा के नामकरण के बाद ही उसके पिता चल बसे. लेकिन इजा ने रुकमा को कभी पिता की कमी महसूस नहीं होने दी. जितना भी बस में था वह रुकमा के लिए करती. पिता के भी ह... Read more


























