सियार और बाघिन की शादी : पहाड़ी लोककथा
पहाड़ सियारों के मूल घर हुआ करते थे और बाघ रहते थे तराई में. एक बार दोनों के सरदारों में तय हुआ कि दोनों अपनी-अपनी जगह बदल लें. सियार रहेंगे तराई में और बाघ रहेंगे पहाड़ों में. सियार तभी तरा... Read more
अजनबी मामा- उत्तराखंडी लोककथा
एक गांव में पति-पत्नी अपने बच्चे के साथ रहते थे. एक बार दोनों के बीच किसी बात को लेकर कहा-सुनी हो गयी. कहा-सुनी इस कदर बढ़ गयी की दोनों ने आपस में बात करना ही छोड़ दिया. दिन बिता महीने बीते... Read more
एक दिन यूं ही बैठे-बैठे ईश्वर ने अपनी लीला रची और बना दिये खूब सारे जीव, नदी-नाले, पर्वत-पहाड़, समुद्र और पेड़-पौंधे. पेड़ की पत्तियों को भरा हरे रंग से, पहाड़ों को भरा पेड़ों से और उनके बीच... Read more
बुद्धिमान कुत्ता : कुमाऊनी लोककथा
एक पहाड़ी गांव में एक आदमी रहता था. अपने घर की छत की मरम्मत के लिये उसने एक दूसरे गांव के पधान से 300 रूपये उधार लिये थे. जब कुछ महीनों बाद भी आदमी उधार न चुका पाया तो पधान उस आदमी के पास गय... Read more
चांद और चकोर के प्रेम की कहानी: लोककथा
चांद और चकोर के प्रेम की कहानी किसने न सुनी होगी. दुनिया में जहां प्रेम का बात होगी वहां चांद और चकोर को खूब याद किया जायेगा. दुनिया भर में चांद और चकोर के प्रेम की खूब कहानियां कही जाती हैं... Read more
आहा, तो बड़ी पुरानी बात होगी. एक कस्बे में खूब बड़ा सेठ रहा करता था. एक दिन उसकी सेठानी को बकरे का ताज़ा मांस खाने की इच्छा हुई. सेठ की नई-नई शादी हुई थी वह अपनी पत्नी को आज भी आकर्षित करना... Read more
अल्मोड़ा के पास ही एक गांव था जिसका नाम था अन्यारीकोट. अन्यारीकोट के लोग भूत-भिसौंड़े को नियंत्रित करने में माहिर माने जाते थे. अन्यारिकोट के लोगों के लोगों के विषय में तरह-तरह के किस्से कहे... Read more
द्वाराहाट का चालाक बैल
द्वाराहाट कुमाऊं के सबसे पुराने नगरों में गिना जाता है. द्वाराहाट की भव्यता के चर्चे पूरे कुमाऊं-गढ़वाल में बरसों से रहे हैं. ऐसा नहीं की केवल द्वाराहाट नगर भव्यता और वहां के लोगों की चर्चा... Read more
लार से भस्म कर देने वाला राक्षस: कुमाऊनी लोककथा
पहाड़ से निकलने वाली नदी किनारे एक सुंदर सी बसावट हुआ करती थी. नदी वार और पार गांव वाले ही खेती करते और जहां से नदी निकलती उस पहाड़ के घने बियावन से लकड़ी ले आया करते. घुप्प अंधेरे वाले जंगल... Read more
लिखा हुआ पत्ता : कुमाऊनी लोककथा
एक था गरीब ब्राह्मण. उसकी एक पत्नी थी – ब्राह्मणी. ब्राह्मणी घूम-घूम कर भीख माँगा करती थी. इसी तरह वे दोनों गुजारा कर रहे थे.(Kumaoni Folklore by Ivan Minayev) एक बार ब्राह्मणी ने सुना कि को... Read more


























