एवरेस्ट मेरा भगवान है – लवराज सिंह धर्मसक्तू
सात बार एवरेस्ट फतह कर चुके बीएसएफ के असिस्टेंट कमांडेंट पद्मश्री लवराज धर्मसक्तू की कहानी भी किसी चमत्कारिक फिल्मी कथा से कम नहीं है. लवराज धर्मसक्तू का गांव बौना मुनस्यारी से 35 किलोमीटर क... Read more
गुरुनानक की सिद्धियों का प्रतीक है नानकमत्ता
यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड राज्य के ऊधमसिंहनगर जिले में स्थित है. नानकमत्ता जिला मुख्यालय रुद्रपुर से टनकपुर जाने वाली सड़क में सितारगंज और खटीमा के बीच में है. पहले गोरखनाथ के अनुयाइयों के रहन... Read more
अनछुई जगह से लौटकर उस यात्रा के अधूरेपन का अहसास दिल को सालता रहता है. मेरे साथ हमेशा ही ऐसा होता है. उस जगह में रच-बसकर जीना हो तो अगली मुलाकातें जरूरी हो जाती हैं. दूसरी यात्रा में ही आप उ... Read more
आयुष प्रदेश बनाने का दावा पहली बार नहीं हुआ है, पहले भी सरकारें आई, उन्होंने भी आयुष प्रदेश बनाने केा लेकर हल्ला मचाया था. सबसे अधिक हल्ला तो पिछली भाजपा सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री डाॅ र... Read more
कोलकाता के सफर में बनारस के बाटी-चोखा का स्वाद
कौन कहता है कि जगह बदले तो खानपान बदलता है. स्वाद बदलता है या फिर खाने का अंदाज बदलता है. बनारस से 680 किलोमीटर दूर कोलकाता में बनारस का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़कर बोलता है. वेजेटेरियन ही... Read more
एक नई ईजाद है पहाड़ में टैक्सियों का पल्टी सिस्टम
पहाड़ में कार, बस या टैक्सी से सफर करने पर सबसे बड़ा सिरदर्द है – जी मिचलाना या उल्टी होना. गाड़ी के पहाड़ चढ़ते ही कुछ लोगों को चक्कर आने लगते हैं और कुछ उल्टी करते-करते पस्त हो जाते हैं.... Read more
व्यांस घाटी के बूदी गांव में किर्जी महोत्सव
काली नदी से लगी सीमान्त व्यांस घाटी के पहले गांव बूदी में हर बारह साल में किर्जी महोत्सव मनाया जाता है. इस माह 5 तारीख को यह संपन्न हुआ. इस उत्सव की कुछ एक्सक्लूसिव फोटोग्राफ्स हमारे साथी दे... Read more
गंगू रमौल और सेम मुखेम के नागराजा श्रीकृष्ण
गढ़वाल की प्रचलित लोकगाथाओं के अनुसार गंगू रमौल टिहरी जनपद में स्थित सेम-मुखीम क्षेत्र के मौल्यागढ़ (रमोलगढ़) का रहनेवाला एक नागवंशी सामंत था. इसका सम्बन्ध भगवान् श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है जिसक... Read more
प्राकृतिक विविधता और हर तरह के पर्यटक के अनुसार मनोरंजन साधनों के कारण नेपाल फिर से तेजी के साथ घुमक्कड़ों की पसन्द बनता जा रहा है. एवरेस्ट सहित अन्य हिमालयी चोटियों पर चढ़ने के लिए हर साल हजा... Read more
कितने धारों के बारे में जानते हैं आप?
उत्तराखण्ड की कुमाऊनी और गढ़वाली बोलियों में दो इलाकों के बीच की सामानांतर लेकिन उठे हुई भूमि को धार कहा जाता है. धार के दोनों तरफ ढलान होती है. अनुमानतः कुमाऊं-गढ़वाल में सैकड़ों धार हैं जिनके... Read more


























