ट्रेल पास अभियान भाग – 3
पिछली कड़ी दूसरे दिन प्रातः चाय के पश्चात् शाह जी थ्रीश कपूर और मैं पुनः खाती गांव गये. कुलियों के लिये राशन तथा आलू खरीदा गया. कपूर साहब विडिया फिल्म लेना चाहते थे. परन्तु बैट्री डाउन होने क... Read more
ट्रेल पास अभियान भाग – 2
पिछली कड़ी पहली जून 1994 को जब अस्कोट-आराकोट अभियान दल मुनस्यारी पहुंचा, दल के अधिकांश सदस्य मेरे पूर्व परिचित मित्र थे. उनके आवास तथा भोजन की उचित व्यवस्था की गई. मैंने लेह-लद्दाख भ्रमण का क... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 5
पिछली क़िस्त का लिंक – जोहार घाटी का सफ़र -4 ‘मामा अब नहीं आएंगे हम ट्रैकिंग में… ! मिलम गांव से मुनस्यारी को वापस आते वक्त नितिन के ये शब्द मुझे मुनस्यारी पहुंचने तक कचोटते रहे. ऐ... Read more
पाताल भुवनेश्वर की यात्रा
उत्तराखण्ड की पावन भूमि आदिकाल से ही मानव सभ्यता का गढ रही है. मनीषीयों, विद्वानों, साधु-सन्तों, विचारकों और तपस्वियों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है. वेद पुराणों में उत्तराखण्ड का व्यापक उल... Read more
चित्रकूट की यात्रा
मैं चित्रकूट से तब से वाकिफ हूं जब मैं पांचवी कक्षा में पढ़ती थी. जानते हैं कैसे? दरअसल मेरे पापा कहानियां बहुत सुनाते हैं तो चित्रकूट की जानकारी भी कहानी के उसी खजाने का हिस्सा थी. अद्भुत... Read more
जोहार घाटी यात्रा भाग-4
(पिछली क़िस्त का लिंक – जोहार घाटी का सफ़र -3) हमने नर बहादुर को ढूंढने में खुद के खो जाने की बात बताई तो उन्होंने बताया कि पहले जब ये गांव आबाद था तो करीब पांचेक मवासे यहां रहते थे. यहा... Read more
जोहार घाटी का सफ़र – 3
(पिछली क़िस्त का लिंक – जोहार घाटी का सफ़र – 2) काफी देर बाद यह सहमति बनी कि कैमरे दे दिए जाएं और कल शंकर भाई की हालत देखकर आगे जाने या न जाने का विचार किया जाएगा. कैमरों को फौजी स... Read more
किन्नौर, स्पीति और लाहौल यात्रा 1
बहुत दिनों से जिस यात्रा को मैं करना चाह रहा था उसका मुहूर्त सितम्बर 18 के तीसरे सप्ताह में निकल पाया. किन्नौर, जिसके बारे में जानने की बहुत पहले से जिज्ञासा थी, का भृमण देर से ही सही लेकिन... Read more
जोहार घाटी का सफ़र – 2
(पिछली क़िस्त का लिंक – जोहार घाटी का सफ़र – 1) मुनस्यारी में हमें परमिट को ध्यान से पढ़ने पर पता चला कि इस क्षेत्र में कैमरे वर्जित हैं. अब क्या करते. मैं तो एक वीडियो और एक रील व... Read more
जोहार घाटी का सफ़र – 1
जोहर घाटी में मिलम गांव भूले नहीं भूलता है. दो बार हो आया जोहार की इन घाटियों में. फिर भी न जाने ये क्यों खींचती सी हैं अभी भी. पहली बार 1998 में गया था तो मुनस्यारी से आगे जाते—जाते ये घाटि... Read more


























