चमोली का चांदपुर गढ़
रानीखेत-कर्णप्रयाग मार्ग पर आदिबद्री से थोड़ी सी दूरी पर सड़क से 200 मीटर की ऊंचाई पर एक दुर्ग के अवशेष हैं. चमोली जिले के चांदपुर क्षेत्र में स्थित इस दुर्ग से लगा एक विष्णु का मंदिर है. दुर्... Read more
श्रीनगर से लगभग 14 किमी दूर कलियासौड़ में सिद्धपीठ मां धारी देवी का मंदिर है. धारी देवी का मंदिर मां काली को समर्पित है. इस मंदिर की मुख्य विशेषता मां काली की शांत मुद्रा वाली मूर्ति है. लोक... Read more
उत्तराखंड नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में एक इमेज उभरकर आती है और वह है चार धाम. हमने उत्तराखंड को एक इमेज में बांध दिया है. खासकर 2013 की आपदा के बाद बाहरी लोग उत्तराखंड को केदारनाथ की वजह... Read more
यारसा गम्बू उच्चहिमालय के कुछ क्षेत्रों में 3500 से 5000 मीटर तक की उंचाई में होता है. यारसा गम्बू, तिब्बती भाषा का शब्द है. स्थनीय भाषा में इसे जडि, क्यूर झार, कीड़ा, कीड़ाघास कहा जाता है. गर... Read more
पंचचूली पर्वत: नरेंद्र परिहार के फोटो
पंचचूली पर्वत पांच पर्वत चोटियों का समूह है. जिनके नाम पंचचूली 1 से पंचचूली 5 तक हैं. ये चोटियाँ उत्तराखंड के उत्तरी कुमाऊं हिस्से में है जिसकी समुद्रतल से ऊंचाई 6,312 मीटर से 6,904 मीटर तक... Read more
दारमा घाटी के तेरह गांव – नरेंद्र परिहार के फोटो
उत्तराखंड प्रदेश के सीमान्त जिले पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील लम्बे समय तक भारत-तिब्बत व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र रही है. इस तहसील में रं जनजाति के लोगों की बसासत है जो यहाँ की तीन घाटियों –... Read more
भीमताल: जिसका उल्लेख मानसखंड में भी मिलता है
उत्तराखण्ड के कुमाऊँ मंडल के नैनीताल जिले के सुंदर तालाबों में से एक है भीमताल. काठगोदाम से इसकी दूरी 24 किमी है. 5000 फीट लम्बे और 1500 फीट चौड़े इस तलब की गहराई 15 मीटर तक बताई जाती है. भी... Read more
चम्पावत का बालेश्वर मंदिर: कमल जोशी के फोटो
कुमाऊँ में टनकपुर से लगभग 75 किमी दूर 1670 मीटर की ऊंचाई पर स्थित चम्पावत का मशहूर बालेश्वर मंदिर शिल्प व लोकथात की समृद्ध पूंजी है. ऐतिहासिक प्रमाणों के अनुसार चौदहवीं शताब्दी में चम्पावत ब... Read more
लोककथा: रूप कुंड की मानव अस्थियों का सच
रूप कुंड में मानव कंकाल पाए जाने के विषय में एक अन्य रोचक कहानी और भी चलन में है. जो पहली कहानी से बिलकुल अलग है. पहली कहानी: क्या है रूप कुंड की मानव अस्थियों का सच देवी पार्वती, जिन्हें स्... Read more
ताड़ीखेत की आबोहवा के मुरीद थे महात्मा गाँधी
ताड़ीखेत के नयनाभिराम प्राकृतिक सौन्दर्य और शीतल, स्वास्थ्यवर्धक वातावरण से महात्मा गाँधी बहुत मोहित हुए. ताड़ीखेत की तारीफ में 11 जुलाई, 1929 को ‘यंग इण्डिया’ में एक लेख लिखा. लेख में उन्हो... Read more


























