गुडी गुडी के राष्ट्रीय प्रतीक
गुडी गुडी डेज़ अंतर देस इ उर्फ़… शेष कुशल है! भाग – 20 अमित श्रीवास्तव (हीरामन-स्मृति) गुडी गुडी के बारे में आपकी उत्सुकता को देखते हुए लेखक ने हीरामन से गुडी गुडी मुहल्ले के बारे में मालूमात... Read more
जलियांवाला बाग़ हत्याकांड के सौ बरस
सन 1919 में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त हो चुका था भारतीयों को इस युद्ध में ब्रिटिशों की सहायता के बदले में पुरस्कार के नाम पर मिला रौलट एक्ट जैसा काला कानून. अब तक ब्रिटिश संसद शासन के हिमायती... Read more
उत्तराखण्ड के नैनीताल जनपद में स्थित बेतालघाट नामक तहसील अनेक किस्से-कहानियों के लिए विख्यात है. हाल ही में इस अपेक्षाकृत कम विख्यात इलाके का भ्रमण किया हमारे फोटोग्राफर साथी जयमित्र सिंह बि... Read more
भ्रष्टाचार की आचार संहिता
हमारे सामान्य राष्ट्रीय जीवन और दिनचर्या की छोटी-छोटी बातों में नैतिकता का हौवा खड़ा करके अपने को चमकाने वालों ने इस देश का वातावरण प्रदूषित कर छोड़ा है. अब भ्रष्टाचार को ही लें. कौन नहीं जानत... Read more
उत्तराखंड में रजस्वला स्त्रियों का गोठ-प्रवास
मकानों के गोठ में हर महीने के चार-पांच दिनों तक मवेशियों के साथ-साथ खड़कुवा और हमारी मां और भाभियां भी रहती थीं. मिट्टी-गोबर से सनी हुई ये औरतें गोठ-प्रवास के पांचवे दिन मील भर की दूरी पर स्थ... Read more
युवाओं से जुड़े 10 ज्वलन्त मुद्दे जो किसी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में शामिल नहीं किये
भारत में आम चुनाव हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने अपने-अपने घोषणा पत्र जारी कर दिए हैं. लेकिन दोनों ने युवाओं से जुड़े कुछ ज्वलन्त मुद्दे छोड़ दिए हैं. युवाओं की इन मांगों को सामने रखते हुए उ... Read more
घोषणा पत्रों में चरम सुख
गैरीगुरु की पालिटिकल इकानोमी : अथ चुनाव प्रसंग-3 पिछली कड़ी- गुलदाढू से सावधान भोंकता कम काटता ज्यादा है शस्य श्यामला धरती में किसानों की मेहनत फल फूल रही हैं. गोठ-भकार-खेत खलिहान अन्न से भरे... Read more
तुम्हारी मां अपनी मां की अनचाही संतान है
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम-दूसरी क़िस्त पिछली क़िस्त का लिंक: 4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम तुम्हारी मां अभी तक स्वेच्छा से मां नहीं बनना चाहती बेटू. लेकिन उसे मां बनना है, कुछ पारिवारिक व सा... Read more
देबी के बाज्यू की चिट्ठियां
कहो देबी, कथा कहो – 40 पिछली कड़ी- कहो देबी, कथा कहो – 39 वह दौर और वे दिन! कितना कुछ याद आता है. गांव से आने वाली बाज्यू की वे चिट्ठियां जो बड़े-बड़े अक्षरों में वे अपने हाथ से लिख कर भेजते थे... Read more
सरकारी विभागों में पावती, सिर्फ पावती नहीं है
उस कक्ष में पांच कर्मचारी उपस्थित थे- तीन पुरुष और दो महिलायें. सभी कुछ देर पहले ही अपने-अपने स्थानों पर आकर बैठे थे. शासकीय भाषा में कहें तो मध्याह्न पूर्व का समय था. कक्ष में -ज़मीन पर, टेब... Read more



























