4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – पच्चीसवीं किस्त पिछली क़िस्त का लिंक: किसी भी लड़की के लिए जे.एन.यू कैंपस में मिलने वाली आजादी बहुत महत्वपूर्ण है मैं लगभग एक महीने बाद अपने हॉस्टल लौटी... Read more
और जीत गई झंगोरे की खीर
राजधानी से तीन गाड़ियों में अफसरों की एक टीम पहाड़ की तरफ चली, यह तय करने कि सरकार द्वारा बजट में पहाड़ के एक जिले के लिए घोषित आईटीआई को जिले के किस स्थान पर खोला जाए? मसला थोड़ा पेचीदा हो... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन -49 (पिछली क़िस्त: ये रहा मेरे हाथ लगी ग्यारहवीं की डायरी का पहला पन्ना) कक्षा पांच में कक्षा में तीसरे नंबर पर आ जाने के बाद से पढ़ाई को लेकर मुझमें जो जुनून पैदा हो गया... Read more
देवभूमि की कथा वाचिका ज्योत्सना पांडे
मेरा नाम हिमसुता ज्योत्सना पांडे है. मैं उत्तराखंड के एक छोटे से गांव, जिसे कस्बा भी कह सकते हैं, ताड़ीखेत से हूं. यहां मैंने प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की, तत्पश्चात मेरा खेलों की तरफ काफी रुझान... Read more
आमा के जीवन की यादें मेरे लिए कहानी बन जाती थी
वे घुमंतु नहीं थे और न ही बंजारे ही थे. वे तो निरपट पहाड़ी थे. मोटर तो तब उधर आती-जाती ही नहीं थी. हालांकि बाद में 1920 के आसपास मोटर आने लगी लेकिन शुरूवात में अधिकतर जनसामान्य मोटर को... Read more
कटी पतंग, राम तेरी गंगा मैली, रहना है तेरे दिल में, पान सिंह तोमर, विवाह, लक्ष्य, कोई मिल गया और न जाने कितनी ही फिल्मों की शूटिंग उत्तराखंड के अलग-अलग इलाकों में हुई है. उत्तराखंड के सभी इल... Read more
कहीं करती होगी वो मेरा इंतज़ार,
कहीं करती होगी वो मेरा इंतज़ार, जिसकी तमन्ना मे फिरता हूँ बेकरार कहीं करती होगी वो मेरा इंतज़ार, जिसकी तमन्ना मे फिरता हूँ बेकरार दूर ज़ुल्फों की छाँव से, कहता हूँ ये हवाओं से उसी बुत की अदा... Read more
कुमाऊ के प्रवेशद्वार हल्द्वानी में विगत 137 वर्षों से लगातार मंचित होती आ रही दिन की रामलीला का शुभारंभ हो चुका है. यह कुमाऊ की एकमात्र दिन की पहली रामलीला भी है. जो कि 130 वर्षों से ज्यादा... Read more
खीम दा की खिमली और प्रधानी का चुनाव
उत्तराखंड में प्रधानी के चुनाव अब जाकर आए हैं लेकिन खीम दा को प्रधानी का बुखार पिछले साल से ही चढ़ने लगा था. वैसे तो खीम दा ने जिंदगी में कोई बड़ा तीर नही मारा ठैरा लेकिन लोगों द्वारा चने के... Read more
भगत सिंह (28 सितम्बर 1907 से 23 मार्च 1931) हाल ही की बात है, मेरा एक दोस्त दिल्ली से आया था. उसने शहर पहुंचने के बाद पता जानने के लिए मुझे फोन किया. उसने बताया कि वह चौराहे पर एक बड़े से बुत... Read more


























