उत्तराखंड के देहरादून ज़िले में यमुना और टोंस नदियों के संगम के समीप स्थित कालसी वह स्थान है जहाँ भारत के प्राचीन इतिहास की सबसे संवेदनशील आवाज़ पत्थर पर अंकित है. इस चट्टान पर उत्कीर्ण सम्र... Read more
हिमालय केवल भौगोलिक संरचना नहीं है, बल्कि यह जैव-विविधता और पारंपरिक ज्ञान की एक समृद्ध प्रणाली का प्रतिनिधित्व करता है. इस क्षेत्र में पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियाँ सदियों से स्थानीय समुदा... Read more
उत्तराखंड में सेवा क्षेत्र का विकास व रणनीतियाँ
उत्तराखंड की भौगोलिक, सांस्कृतिक व पर्यावरणीय विशेषताएं इसे पारम्परिक व आधुनिक दोनों प्रकार की सेवाओं के लिए अत्यंत संभावनाशील राज्य बनाती हैं. यहां धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक व रोमांचका... Read more
कैसे बसी पाटलिपुत्र नगरी
हमारी वेबसाइट पर हम कथासरित्सागर की कहानियाँ साझा कर रहे हैं. इससे पहले आप “पुष्पदन्त और माल्यवान को मिला श्राप” और “पुष्पदंत बने वररुचि और सीखे वेद” कहानियाँ पढ़ चुक... Read more
पुष्पदंत बने वररुचि और सीखे वेद
आपने यह कहानी पढ़ी “पुष्पदन्त और माल्यवान को मिला श्राप“. आज की कहानी में जानते हैं पुष्पदंत के साथ आगे क्या हुआ. श्राप के कारण, पुष्पदंत धरती पर वररुचि (जिन्हें कात्यायन भी कहा... Read more
चतुर कमला और उसके आलसी पति की कहानी
बहुत पुराने समय की बात है, एक पंजाबी गाँव में कमला नाम की एक स्त्री रहती थी. उसका पति, एक नाई, बहुत आलसी था. वह दिन भर चौराहे पर बैठकर गप्पें मारना पसंद करता था, लेकिन काम बहुत कम करता था. इ... Read more
धर्मेन्द्र, मुमताज और उत्तराखंड की ये झील
धर्मेन्द्र की मृत्यु की खबर ने दुनिया भर में उनके चाहने वालों को शोक में डाल दिया है. उनके लंबे और बहुरंगी करियर में अनेक फ़िल्में ऐसी हैं जो आज भी दर्शकों के मन में बसी हुई हैं. इन्हीं में... Read more
महान सिदुवा-बिदुवा और खैंट पर्वत की परियाँ
बहुत समय पहले तिब्बत में सोनपाल नाम का एक राजा राज करता था. उसकी सात बेटियाँ थीं, जिनमें सबसे बड़ी थी जोत्रामाला. उसकी सुंदरता ऐसी थी जैसे पूर्णिमा का चाँद धरती पर उतर आया हो. जोत्रामाला हर... Read more
उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल में मेलों और त्योहारों का इतिहास बहुत पुराना है. ऐसा ही एक ऐतिहासिक और प्रसिद्ध मेला है – स्याल्दे बिखौती मेला. यह मेला कुमाऊँ के प्राचीन शहर द्वाराहाट के विभान्डेश्... Read more
हर साल 14 नवंबर देश में भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन नेहरू केवल बच्चों के चाचा ही नहीं थे वो प्रकृति, विशेषकर हिमालय और भ... Read more


























