रंगरूटी में निखरती हनुमंत की जवानी
हनुमंत सिंह के बड़े भाई फौज में थे. उन दिनों वे किसी अफसर के ‘खास आदमी’ थे. कहने का तात्पर्य है कि, वे ‘बटमैन’ का ओहदा संभाले हुए थे. संयोग से वही अफसर ‘रिक्रूट... Read more
फेल होने पर भागने का एक ट्रेंड
परीक्षाफल का दिन नजदीक आते ही डर और आशंका का माहौल बनने लगता था. तब रिजल्ट निकलता भी बहुत खौफनाक तरीक़े से था. इलाके-के-इलाके साफ हो जाते. कई दिनों तक भारी नरसंहार जैसा माहौल बना रहता था. तो... Read more
घोर कलजुग इसी को कहते हैं
उन दिनों समाज में नैतिकता का जोरदार आग्रह रहता था. हर किसी पर घनघोर नैतिकता छाई रहती थी. लड़के, अपने परिवार के सदस्यों से तो डरते ही थे, मोहल्ले वालों से उनसे भी ज्यादा डरते थे. अपनों ने देख... Read more
मुठ्ठी भर कंचे
तब गाँव क्या था, श्याम-श्वेत सिनेमा के दौर का सा गाँव लगता था. चौतरफा खेत-ही-खेत थे, गन्ने-सरसों की फसलों से लहलहाते हुए. गाँव में कुएँ थे, तो रहट भी. यातायात के साधनों में, बैलगाड़ी से लेकर... Read more
विषय से ज्यादा कठिन शिक्षक
गणित से लड़के दूर- दूर भागते थे. इस पर अफसोस इस बात का था कि, भविष्य के बेहतर मौके, केवल इसी विषय में मौजूद बताए जाते थे. ‘अगर गणित के साथ अच्छे दर्जे में पास हो जाएँ’ तो, अनेक क... Read more
मैं ही मैं हूँ, मैं ही सूर्य हूँ, मैं ही मनु…
कॉलेज के दिन थे. रंगीन रुमाल मे इत्र के फाहे रखने की उम्र थी. तो दूसरी तरफ परंपरा-विद्रोह की अवस्था. साइकिल खींचना, तौहीन मानने की उम्र हो चली थी. कॉलेज जाये बिना गुजर भी नहीं थी. युक्ति और... Read more
गुर्जी अगर सँभलोगे नहीं तो ऐसे गिर पड़ोगे – हलवाहे राम और लेक्चरार साब की नशीली दास्तान
दोनों में अटूट दोस्ती थी. कुछ ऐसी कि, लंबे समय तक इस दोस्ती ने खूब सुर्खियाँ बटोरी. दोनों के घर आस-पास ही थे. एकदम निकट पड़ोसी समझ लीजिए. उनमें से एक, पूरे गाँव-जवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिख... Read more
परीक्षा माने – ‘पर इच्छा’
दो दोस्त थे. दोनों में काफी घनिष्ठता थी. दाँत काटी दोस्ती समझ लीजिए. ये बात, इस नजरिए से बखूबी साबित होती थी कि, बेहद नाजुक मौकों पर भी दोनों ने हमेशा एक ही जैसे कदम उठाए. मास्टर डिग्री के द... Read more
‘मिसाइल मैन’ वाली हेयर स्टाइल
कुछ रोज पहले की बात है. मैं, बाल कटवाने गया था. नापित के यहाँ बाल कटवाने में नंबर लगाना पड़ता है. पुरानी सी दुकान थी. दुकान में एक टूटी हुई व्हीलचेयरनुमा जीर्ण-शीर्ण कुर्सी थी, जिस पर एक नौज... Read more
विशाल हृदय वाले गुरूजी और हिरन का आखेट
हेडमास्टर साहब, मस्तमौला आदमी थे. टेंशन बिल्कुल नहीं पालते थे. बरसात के दिनों को छोड़कर, सालभर कक्षाएँ बाहर लगती थीं. स्कूल- बिल्डिंग के आगे एक खुला सा मैदान था. पहाड़ के हिसाब से अच्छा-खासा... Read more


























