सामान्यतः पहाड़ के गांव की महिलाओं के दैनिक जीवन का स्वरूप अत्यधिक व्यस्त और संघर्षमय रहता है. छह ऋतुओं, 12 महीने उनके पास हर माह, हर दिन और हर घंटे के लिए कोई न कोई काम बना ही रहता है. खे... Read more
माँ का जादुई बक्सा
हलवाई पांचवीं बार अपना हिसाब करने आया था. (Mother’s Magic Box) —’तुम्हारा कितना हुआ भाई’ पापा पांचवीं बार उससे पूछ रहे थे. सोचते थे शायद इस बार कुछ कम बता दे. अंदर आकर अपना... Read more
‘सिल्वर वेडिंग’ मनोहर श्याम जोशी की कालजयी कहानी
जब सेक्शन ऑफीसर वाई․डी․ (यशोधर) पन्त ने आखि़री फ़ाइल का लाल फ़ीता बाँध कर निगाह मेज़ से उठायी तब दफ़्तर की पुरानी दीवार घड़ी पाँच बजकर पच्चीस मिनट बजा रही थी. उनकी अपनी कलाई घड़ी में साढ... Read more
कहानी : बयान इक़बालिया
‘इसे क्या हुआ है इतना गुमसुम क्यों है’ चौकी इंचार्ज साहब ने दस मिनट बाद ही पूछ लिया. (Bayan Iqbaliya) ‘सर जबसे चीला बैराज से लौटा है… दो घण्टे से ऐसे ही बैठा है.... Read more
‘जिस मकान पर आपके बेटे ने ही सही, बडे़ फख्र से ‘बंसीधर पाठक ‘जिज्ञासु’ की तख़्ती टांग दी थी, उसमें देवकी पर्वतीया का खून-पसीना लगा है. यह नाम कभी आपने ही उन्हें दिया था लेकिन नेम प्लेट पर अप... Read more
चालाक खरगोश ने हाथियों के झुंड को भगा दिया
एक वन में हाथियों का एक झुंड रहता था. झुंड के सरदार को गजराज कहते थे. वो विशालकाय, लम्बी सूंड तथा लम्बे मोटे दाँतों वाला था. खंभे के समान उसके मोटे मोटे पैर थे. जब वो चिंघाड़ता था तो सारा वन... Read more
‘वेश्या की लड़की’ सुभद्रा कुमारी चौहान की कहानी
छाया, प्रमोद की सहपाठिनी थी. प्रमोद, नगर के एक प्रतिष्ठित और कुलीन ब्राह्मण परिवार का लड़का था. और छाया? छाया थी नगर की एक प्रसिद्ध नर्तकी की इकलौती बेटी. नगर में एक बहुत बड़ा राधाकृष्ण का म... Read more
कौवों और उल्लुओं की लड़ाई: एक कहानी पंचतंत्र से
दक्षिण देश में महिलारोप्य नाम का एक नगर था. नगर के पास एक बड़ा पीपल का पेड़ था. उसके घने पत्तों से ढकी शाखाओं पर पक्षियों के घोंसले बने हुए थे. उन्हीं में से कुछ घोंसलों में कौवों के बहुत से... Read more
लोककथा : मेंढक राजकुमार
ऊँचे पहाड़ों की चोटी पर एक गरीब दम्पत्ति रहते थे. अपने ढलवां खेतों पर फसल बोकर वे किसी तरह गुजारा करते. पहाड़ी के निचले ढलानों पर उन दोनों मेहनती पति-पत्नी ने अपने खेत बनाये हुए थे. (Folklor... Read more
कहानी : ज़िंदगी से प्यार
-जैक लंडन “सब कुछ में से बस यह बचा रह जाएगा-उन्होंने जिन्दगी जी है और अपना पासा फ़ेंका हैखेल में बहुत कुछ जीता जाएगापर पासे का सोना तो हारा जा चुका है.” (Story by Jack London) वे दर्द से लँग... Read more


























