श्रीनगर बाज़ार के बीर सेन
‘जहां कुछ नहीं, वहां प्रेम रहता है, आपसी विवाद तो जगह के भरने पर होता है कि उसके पास ज्यादा और अच्छा है, मेरे पास कम और खराब. हमारी पुश्तैनी जमीन-जायदाद कुछ थी नहीं, फिर, भाईयों में आपस में... Read more
बहुत पहले उनकी एक प्रकाश्य पुस्तक के नाम ने आकर्षित किया था. नाम था – नागपुर के नक्षत्र. दो साल पहले जब उनके शास्त्री विहार स्थित आवास पर मिलने गया तो अपनी कुछ किताबों के आदान-प्रदान क... Read more
शमशेर सिंह बिष्ट ठेठ पहाड़ी थे. उत्तराखंड के पहाड़ी ग्राम्य जीवन का एक खुरदुरा, ठोस और स्थिर व्यक्तित्व. जल, जंगल और ज़मीन को किसी नारे या मुहावरे की तरह नहीं बल्कि एक प्रखर सच्चाई की तरह जी... Read more
क्या हो अगर जिस बैग में दुल्हन के लाखों के जेवरात रखे हों ऐन फेरों के मौके पर वे गुम हो जाएँ. जब दुल्हन का पूरा परिवार ग़मगीन होकर सोच रहा हो कि अब संकट को कैसे हल करें, तभी खोये हुए जेवर और... Read more
जीवन और जीविका की सुनहरी राह बनाते विनीता-अरविंद
कोरोना महामारी ने समाज के बहुसंख्यक लोगों की जीवन-दिशा को बदला है. जीवन में अचानक आये इस संकट ने लोगों को हताश-निराश तो किया परन्तु उनके मन-मस्तिष्क में अन्तर्निहित शक्तियों और हुनर को उभारा... Read more
वीर भड़ माधो सिंह भंडारी की कहानी
एक सिंह रैंदो बण, एक सिंग गाय काएक सिंह ‘माधोसिंह’ और सिंह काहे का (Madho Singh Bhandari) जिन रणबांकुरे श्री माधोसिंह भण्डारी के लिये आज भी सारे गढ़वाल में उपरोक्त उक्ति प्रचलित... Read more
आज पंडित नैनसिंह रावत का जन्मदिन है
तिब्बत का पहला भौगोलिक अन्वेषण करने वाले उन्नीसवीं शताब्दी के महानतम अन्वेषकों में से एक माने जाने वाले मुनस्यारी की जोहार घाटी के मिलम गाँव के निवासी पंडित नैनसिंह रावत के बारे में लेख काफल... Read more
‘‘…. मेरा जीवन संघर्षमय रहा. ऐसा नहीं है कि जीवन-यात्रा की शुरुआत के लिए मुझे किसी चीज की कमी रही हो. लेकिन मार्गदर्शन और संपर्क साधनों की हमेशा कमी रही. इसलिए मुझे स्वयं भटकते हुए इस... Read more
आज शैलेश मटियानी का जन्मदिन है
आज शैलेश मटियानी का जन्मदिन है. यह लेख 1996 में शैलेश मटियानी से हुई बातचीत का एक हिस्सा है जिसमें वह एक बड़ा उपन्यास को लिखने के विषय में बता रहे हैं. उपन्यास का शीर्षक उन्होंने तय कर लिया ह... Read more
एक महान कला साधक की रंगयात्रा का महत्वपूर्ण दस्तावेज है ‘स्मृतियों में मोहन उप्रेती’
पहाड़ी लोक गीतों को अपनी सुरीली धुनों से संवारने वाले मोहन उप्रेती के अनेक गीत और नाट्य प्रस्तुतियां आज भी जन मानस के मध्य जीवन्त बनी हुई हैं. यह मोहन उप्रेती की अलौकिक धुन का ही कमाल था कि... Read more


























