सूचना क्रांति की टूंटूं
सूचना क्रांति हो चुकी है. सामने ख़ाली बैठे आदमी को फोन लगाइए तो आवाज़ आती है कि सामने वाला उपलब्ध नहीं है या व्यस्त है. फोन लग जाता है तो अगले के हेलो कहने के साथ ही टूंटूं की ध्वनि हड़काने लगत... Read more
सखा का आमलेट और कानपुर वाले रज्जू मामा के टमाटर
सखा की शादी हुए दो माह बीत गए थे. इस दौरान वे केरल और राजस्थान जाकर हनीमून निबटा आये थे. इन महीनों में उन्होंने अपने उन सभी अन्तरंग मित्रों को भी निबटा दिया था जिनके बगैर अपने लौंडयुग में वे... Read more
इक आग का दरिया था और डूब के जाना था – गणित का परचा
मशहूर कथाकार मुंशी प्रेमचंद को गणित हिमालय सी ऊँचाई का लगता था. आगे की कई पीढ़ियों को भी लगा. महावीर को उससे भी ज्यादा. पाँचवी का बोर्ड उसके लिए अभेद्य सा दुर्ग बन गया . चार साल से लुढ़कते-लुढ़... Read more
बिनसर में इटली का संत
लम्बे धवल केश और वैसी ही लम्बी धवल दाढ़ी वाले उस खूबसूरत अंगरेज़ को देखकर किसी को भी धोखा हो सकता था कि वह धर्म-प्रचारक या बाबा टाइप की कोई चीज़ होगा. बिनसर-कसारदेवी-अल्मोड़ा के इलाके में चार-पा... Read more
इतना हरा इतना बिनसर
अल्मोड़ा से कोई तीस-पैंतीस किलोमाटर दूर बिनसर वन्यजीव अभयारण्य की सुन्दरता बरसातों में कई गुना बढ़ जाती है. हरियाली का ऐसा विस्फोट होता है कि अमेज़न के रेन फॉरेस्ट्स की याद आ जाय. बरसातों में ब... Read more
शऊर हो तो सफ़र ख़ुद सफ़र का हासिल है – 7
जरूरत है जरूरत है… सख्त जरूरत है ! इसके पहले मैं गंभीर गायन को बड़ी दी के `मेरे जल्फ़ को समझकर ज़रा बिजलियाँ गिराना’ से रिलेट करता था और सुगम संगीत को लाईट जाने के बाद छीना-झपटी तक उतरी ह... Read more
दिल टूटे हुए आशिकों का नया एन्थम सांग
साल 2008 था और गाना तूने मेरे जाना कभी नहीं जाना इश्क मेरा दर्द मेरा. यह गाना 2008 से 2009 तक आते आते भारतीय आशिकी का एन्थम सांग बन गया. हाईस्कूल से लेकर कालेज तक पढ़ने वाले हर गंभीर आशिक की... Read more
टीचर्स डे स्पेशल : नकलची छात्र और दयालु मास्साब
तब यूपी सरकार का बहुचर्चित नक़ल अध्यादेश लागू नहीं हुआ था. हालाँकि जब यह लागू भी हुआ तो उस माहौल का कुछ नहीं बिगाड़ पाया जो उस वक़्त हुआ करता था. सरकारी स्कूलों में तब परीक्षाओं में नक़ल का ही स... Read more
हजारे का चूरा
आज न जाने कैसे अचानक ‘चूरे’ की याद आ गई- जैसे वर्षों बाद कोई बाल सखा सामने आ जाए. सचमुच यार चूरे तू भी क्या चीज था. अब न तू है, न अपना वो बचपन. पर तेरी यादें हैं, रहेंगी. मेरे हम उम्र वो सभी... Read more
कछुआ खरगोश की अल्मोड़िया कथा
पटवारी पद के सैकड़ों उम्मीदवार शारीरिक दमखम साबित करने के लिए दस किलोमीटर की दौड़ में हिस्सा ले रहे थे. वह भी एक उम्मीदवार था और कांखता-कराहता किसी तरह दौड़ रहा था. यह सोचकर वह हैरान था कि दौड़न... Read more


























