तुम कम से कम रोओ, ज्यादा से ज्यादा खुश रहो
4G माँ के ख़त 6G बच्चे के नाम – 37 (Column by Gayatree arya 37) पिछली किस्त का लिंक: आज पहली बार तुमने मेरी आंखों में आंखें डाल के देखा इस वक्त रात का पौने एक बजा है और तुम 12 बजे से बिस्त... Read more
वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली (25 दिसम्बर, 1891 – 1 अक्टूबर 1979) भारत सरकार ने 1994 में उनकी फोटू वाला एक डाक टिकट जारी किया और नामकरण किये जाने से छूट गईं एकाध सड़कों के नाम उनके नाम पर रख... Read more
आजकल प्रायः कुमाऊँ इंजीनियरिंग कॉलेज के लिए उल्लेख होने वाले द्वाराहाट नगर के सम्बन्ध में किवदंती रही है कि कुमाऊँ के द्वाराहाट क्षेत्र को देवता, उत्तर की द्वारिका बनाना चाहते थे परन्तु बाधा... Read more
क्रिसमस ट्री : सिर्फ पेड़ नहीं, परम पिता परमेश्वर में हमारी आस्था व विश्वास का प्रतीक
क्रिसमस का त्यौहार आ गया है. आइए, आज ‘क्रिसमस ट्री’ की बात करते हैं. (Christmas tree Deven Mewari) क्रिसमस ट्री यानी वही हरा-भरा, प्यारा-सा पौधा जिसे क्रिसमस यानी बड़े दिन के त्योहार पर घर म... Read more
कहते हैं पहाड़ियों का भाग, भागकर ही जागता है
प्रवास अर्थात अपने मुल्क से दूर गैर मुल्क में बस जाना. ये गैर मुल्क अपने देश में भी हो सकता है और विदेश में भी. वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में 3 प्रतिशत लोग विदेश में प्रवास... Read more
उत्तराखण्ड का एक गुमनाम पर्यावरण मित्र
जब प्रकृति वैभव की बात होती है तो तुरंत मानस पटल पर सुखी समृद्ध जीवन का बिम्ब उभरता है और दिखता है उस जहाँ में हँसते गाते कलरव करते जीवों का संसार और जीवन के लिए प्रकृति की साझेदारी. प्रकृति... Read more
पहाड़ों में किसी भी बीमारी में झाड़फूंक का रिवाज चला आया है. पीलिया होने, दाँत में घुनता लगने या कीड़ा लगने, बाई पड़ने, बुखार आने, साँप के डंसने पर अलग अलग तरीकों से झड़वाने की क्रिया स... Read more
पहाड़ी रस्या के मसाले धुँआर को बचाना होगा
हफ्ते भर पहले उत्तर उजाला के समाचार सम्पादक व दगड़ू चन्द्रशेखर जोशी के साथ बचदा (जनमैत्री संगठन के बच्ची सिंह बिष्ट) के घर गया तो वहॉ उनके सगवाड़े में धुँआर देखकर मन प्रसन्न हो गया. लौटते सम... Read more
और मैं जुल्फ को हवा देता हुआ स्कूल से कॉलेज पहुंचा
पहाड़ और मेरा जीवन- 61 (पिछली क़िस्त: गरीब के गुरूर को मत जगाना कभी, मैंने चश्मे वाले को यूं दी जबर धमकी) पिथौरागढ़ के जिस राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की बाडंड्री से सटे सद्गुरू निवास के... Read more
उत्तराखण्ड का पारंपरिक पहनावा और जेवर
पहाड़ में नंगा सर रहना बुरा समझा जाता था. सर में टोपी डालने का चलन था. कम हैसियत वाले धोती बांधते. मलेसिया और जूट के पजामे और कुरता बनता. खादी और सूती कपड़ा खूब चलन में था. सुराव, मिरजई, फतु... Read more


























