चट्टान से गिरकर अकाल मृत्यु को प्राप्त पहाड़ी घसियारिनों को समर्पित लोकगाथा ‘देवा’
बहुत सुन्दर गाँव था. खूब गधेरा पानी. अपनी बंजाणी घना जंगल और थी उसी गाँव में एक सुन्दर निर्मल झरने की तरह लड़की देवा. सारे गाँव की बेटी. हमेशा उसके पास एक हँसी रहती थी. दुखी से दुखी उस हँसती... Read more
जिनके बिना भवाली का इतिहास अधूरा है
ब्रिटिश शासन के दौरान ही भवाली के पास नैनीताल-हल्द्वानी रोड पर लगभग एक किमी की दूरी पर वर्ष 1912 में भवाली सेनेटोरियम की स्थापना किंग जॉर्ज एडवार्ड सप्तम के कार्यकाल में हुई. समुद्रतल से 168... Read more
महिलायें पहाड़ में जीवन की रीढ़ हैं. महिलायें न होती तो पहाड़ दशकों पहले बंजर हो जाते. संघर्ष से भरे उनके जीवन में उनके पास इतना भी समय नहीं की वे अपने बच्चों को अपना समय दे सकें. काम की ऐसी... Read more
बौधाण: पहाड़ियों के जानवरों का लोकदेवता
आंगन में बिना जानवरों के पहाड़ में जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. जानवर उनके जीवन में दिन और रात के साथी नहीं परिवार का अभिन्न हिस्सा होते हैं. गाय, बैल, भैंस, बकरी, कुत्ता कुछ ऐसे जानवर है... Read more
विलुप्त होती अपनी लोक भाषाओं को हमें ही बचाना होगा
अभी हाल में अखबारों में प्रकाशित खबर पढ़ने को मिली कि उत्तराखण्ड विधानसभा अध्यक्ष ने प्रदेश की भाषाओं-गढ़वाली, कुमाउनी तथा जौनसारी के सरंक्षण के लिये विधायकों की एक समिति गठित की है. समाचार... Read more
ज़ेन गुरू ने यूं सिखाया शिष्य को सबक
हिंदी की एक बहुत प्रचलित कहावत है – बिना मरे स्वर्ग नहीं मिलता. इस बात की सत्यता को लेकर संदेह करने की जरा भी गुंजाइश नहीं. लेकिन सवाल यह है कि ऐसी कहावत बनी और प्रचलित क्यों हुई? क्या... Read more
भविष्य: एक पहाड़ी लोहार की कहानी
रतखाल की दुकानों से लौटे हरकराम गुमसुम से बैठे हैं. वहाँ से आते वक्त ही पैर टूटने लगे थे. दो मील का सफर ही अंतहीन हो गया था, जबकि सारा रास्ता ढलान का था. चढ़ाई होती तो घर पहुँचना मुश्किल ही... Read more
“जो घाव लगे और जाने गयीं वे प्रतिरोध की राजनीति की कीमत थी”,1996 में इलाहबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रवि एस. धवन की खंडपीठ ने अपने फैसले में लिखा. जिस सन्दर्भ में वे इस बात को लिख रहे थ... Read more
भोटान्तिक अर्थव्यवस्था और हूण देश से व्यापार
इतिहास के पुराने पन्नों में गंगा के मैदानों से हिमालय की गगनचुम्बी उपत्यकाओं की ओर अपने पशुओं के साथ बढ़ती भिल्ल किरात जाति के प्रवेश की गाथा है. पशुचारकों का जीवन जीते प्रकृति के सान्निध्य... Read more
कल पत्थरों के महान पारखी और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति के पद्मभूषण से सम्मानित भूगर्भ विज्ञानी डा. खड्ग सिंह वल्दिया साढ़े त्रिरासी वर्ष की उम्र में इस धरती से विदा हो गए. उनका जीवन संघर्ष और कुछ... Read more


























