Featured

कुमाऊं कमिश्नर ट्रेल के तीन अच्छे काम

ट्रेल कुमाऊँ के दूसरे कमिश्नर रहे. उन्हीं के नाम पर पिथौरागढ़ और बागेश्वर के बीच के दर्रे को ट्रेल पास नाम दिया गया था. वैसे ट्रेल जनता के बीच एक बदनाम नाम था लेकिन उससे पहले के गोरखाओं के कठोर निर्मम शासन के कारण उसका शासन का जनता ने पसंद किया. उसे पसंद किये जाने का एक अन्य कारण उसके द्वारा किये गये सामाजिक सुधार भी थे.

ट्रेल के कार्यकाल से पूर्व कुमाऊँ क्षेत्र में कोई पति अपनी पत्नि के अपहरणकर्ता की हत्या सरकार को केवल सूचना मात्र देकर कर सकता था. पत्नीं से वंचित पति न्यायकर्ता और जल्लाद दोंनो का कार्य स्वयं कर लेता था. पहले तो खूबसूरत महिलाओं के पति ने इर्ष्या के कारण निर्दोष व्यक्ति को मारना शुरू कर दिया बाद में अनेक विवाहित पुरुषों ने इस कानून का फायदा उठाकर निर्मम हत्यायें की. ट्रेल ने इस प्रकार की हत्याओं को अपराध घोषित किया और हत्यारे को मृत्यु दंड देने का आदेश दिया.

गोरखाओं के समय से एक अन्य प्रथा प्रचलित थी इसके तहत पति द्वारा अपनी पत्नी और विधवा स्त्री को पति के परिवार के लोगों को बेचने का अधिकार था. बच्चों को भी बेचा जाता था जिसपर गोरखा सरकार विधिवत टैक्स तक लेती थी. ट्रेल ने इसे भी प्रतिबंधित किया.

ट्रेल ने अपने कार्यकाल में पत्नी वापस पाने, कैनी और छ्यौड़े ( बंधुवा कृषि मजदूर ) की अदला-बदली विक्रय आदि मुकदमों के लिये अदालतों के दरवाजे बंद कर दिये.

ट्रेल के शासन का समाज सुधार के क्षेत्र में एक काला पक्ष यह था कि जब पूरे ब्रिटिश भारत में सती प्रथा प्रतिबंधित हो गयी थी तो उसने सती प्रथा प्रतिबंधित करने वाला काला कानून कुमाऊँ में पारित नहीं होने दिया.

मदन मोहन करगेती की पुस्तक स्वतंत्रता आन्दोलन तथा स्वातंत्र्योतर उत्तराखण्ड के आधार पर.

-काफल ट्री डेस्क

वाट्सएप में पोस्ट पाने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री
हमारे फेसबुक पेज को लाइक करें: Kafal Tree Online

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Girish Lohani

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

2 weeks ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago