Featured

ताड़ीखेत की आबोहवा के मुरीद थे महात्मा गाँधी

ताड़ीखेत के नयनाभिराम प्राकृतिक सौन्दर्य और शीतल, स्वास्थ्यवर्धक वातावरण से महात्मा गाँधी बहुत मोहित हुए. ताड़ीखेत की तारीफ में 11 जुलाई, 1929 को ‘यंग इण्डिया’ में एक लेख लिखा. लेख में उन्होंने लिखा कि ‘मुझे आश्चर्य है कि ऐसी स्वास्थ्यवर्धक पहाड़ियों के के होते हुए हमारे देश के लोग यूरोप में स्वास्थ्य लाभ के लिए क्यों जाते हैं?’

चीड, देवदार, बांज, बुरांश के घने जंगलों के बीच मनोरम पहाड़ी घाटी पर बसा है ताड़ीखेत, यह अल्मोड़ा जिले की रानीखेत तहसील का हिस्सा है. रानीखेत रामनगर रोड पर रानीखेत से ताड़ीखेत की दूरी 8 किमी है.  

ताड़ीखेत के एक तरफ रानीखेत की पहाड़ी चोटियाँ हैं तो दूसरी तरफ है कमललेख की पहाड़ी.

ताड़ीखेत की सबसे खूबसूरत जगह पर बनी है गाँधी कुटी. इसका निर्माण 1929 में ताड़ीखेत के प्रेम विद्यालय के छात्रों और अध्यापकों ने महात्मा गाँधी के प्रवास पर उनके रहने के लिए किया था. इस गांधी कुटी में गांधी 3 दिन तक रहे थे.

गांधी कुटी के प्रांगण में डॉ. काटजू द्वारा लगाया गया बांज का पौधा अब विशाल वृक्ष के रूप में फल-फूल रहा है.  

ताड़ीखेत से 3 किमी की दूरी पर है बिनसर महादेव. यहाँ देवदार के घने जंगलों के बीच बिनसर महादेव का मंदिर, एक भव्य आश्रम और विद्यालय भी है.

(उत्तराखण्ड ज्ञानकोष, प्रो. डी. डी. शर्मा के आधार पर )

काफल ट्री वाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिये यहाँ क्लिक करें: वाट्सएप काफल ट्री

काफल ट्री की आर्थिक सहायता के लिये यहाँ क्लिक करें

Sudhir Kumar

Recent Posts

कुमाऊँ की विलुप्त होती जन्माष्टमी पट्ट-चित्र परम्परा

कुमाऊँ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल भगवान कृष्ण के जन्म का धार्मिक पर्व नहीं रही है,…

1 week ago

बद्रीदत्त पांडे और इंद्र सिंह नयाल ने रखा था ‘उत्तराखंड राज्य की संकल्पना’ का वैचारिक आधार

पिछली कड़ी : पहले समाज बदलो, राज्य अपने आप सार्थक हो जाएगा : इंद्र सिंह नयाल इन्द्र…

2 weeks ago

आकर्षक कलेवर में आंचलिक परिवेश की किताब “टुकड़ा-टुकड़ा जिंदगी”

पूरी तरह आंचलिक परिवेश में तैयार, "टुकड़ा टुकड़ा जिंदगी" वरिष्ठ इतिहासकार डॉ निर्मल जोशी की नव प्रकाशित…

2 weeks ago

भूख न तीस न डर न फिकर छ्, मुट्ट बोटीं छन कसीं कमर छ्

ये सितंबर 1994 की सुबह थी जब खटीमा में पूर्व सैनिकों का जुलूस निकल रहा था. पूर्व…

2 weeks ago

उत्तराखण्ड के सरोवर

उत्तराखण्ड को सामान्यतः हिमालय, नदियों, झरनों और जलधाराओं की भूमि के रूप में जाना जाता है. किंतु…

2 weeks ago

दौड़ता अल्मोड़ा : फ़ोटो निबंध

पिछले 3 सालों से अल्मोड़ा के कुछ जागरूक युवा अल्मोड़ा मानसून मैराथन का आयोजन कर रहे हैं,जिसमें…

2 weeks ago