कहानी: भागने वाली लड़कियां
लड़कियों के लिए सड़क की ओर की चढ़ाई चढ़ना किसी यातना से गुजरने जैसा रहा. खड़ी चढ़ाई उनके ही नहीं अच्छे-अच्छों के होश ठिकाने लगा देती थी. दोनों किसी से मिले तथा कुछ कहे बगैर चुपचाप गांव से चल... Read more
कोई जगह किसी का इंतजार नहीं करती ?
कुछ स्मृतियां इस तरह की होती हैं कि आपका पीछा नहीं छोड़ती. सोते-जागते, उठते-बैठते आपको परेशान करते रहती है. आप उनसे मुक्त होना चाहते हैं, मगर मुक्त होने की कोई सूरत नजर नहीं आती. सतवारी की या... Read more
दूसरे की थाली पर नजर रखने वाले
कुछ लोग होते हैं, जो अपनी क्षमता तथा सामर्थ्य के अनुसार अपने जीवन की बेहतरी की कोशिश करते हैं. इसमें कुछ कामयाब होते हैं. कुछ कामयाब नहीं होते. कुछ होते हैं, जिन्हें जो मिलता है, उसे खुशी-खु... Read more
डरने वाले भाई साहब
भाई साहब डरने वाले व्यक्ति हैं. उनके डर कई प्रकार के हैं. वे सुबह उठते समय आने वाले दिन की चुनौतियों के बारे में सोचकर डरते हैं. घर से काम को निकलते हुए सफर को लेकर डरते हैं. काम खराब न हो ज... Read more
उनका भाषण प्रेम
वे न्यू छंगामल इंटर कालेज के प्रिंसिपल थे.वही राग दरबारी जैसा छंगामल इंटर कालेज. उसी की तरह मैनेजमेंट का विद्यालय. उसी तरह सोर्स और पैसों से वे कभी इस विद्यालय में अवतरित हुए.आप सोच रहे होंग... Read more
छोटा होने की यंत्रणा से गुजरते भाई साहब
भाई साहब को बचपन से ही ‘बड़ा आदमी’ बनने की ललक लग गई थी. तभी उन्होंने देख लिया था कि बड़े आदमियों के जलवे हैं. जहां देखो उन्हीं का बोलबाला है. सब उन्हीं की बातें करते हैं. हीरो तो... Read more
Popular Posts
- वह माला के गेट पर सुबह-शाम पहरा देते मिलता
- पहाड़ो में भूस्खलन
- जर्मन की लड़ाई और रुद्रनाथ की चढाई
- हिमालय की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर प्रोफेसर पूरन चंद्र जोशी
- हैप्पी बर्थडे कॉर्बेट साहब
- 28 साल के युवा से जब टिहरी रियासत डर गई
- दुनिया में शांतिपूर्ण आंदोलनों का संक्षिप्त इतिहास
- गांधीजी ने दुनिया के सबसे बड़े अहिंसक आंदोलन का संचालन कैसे किया?
- भारत में आँसू गैस के गोले सबसे पहले अंग्रेज़ लाए थे
- कुमाऊं का सबसे बड़ा सामाजिक समूह “खस” रहा : आर. डी. सनवाल
- हरेला: प्रकृति, परंपरा और विज्ञान का अद्भुत संगम
- हरेले के रंग में पहाड़ : फोटो निबन्ध
- अब हल्द्वानी में पहाड़ी उत्पादों के सबसे विश्वसनीय ब्रांड ‘मुनस्यारी हाउस’ की शुरुआत
- खड़कमाफी के जीवन में एक दशक से विचरते एकदंत गजराज
- क्या उत्तराखंड, पारिस्थितिक वहन क्षमता को लागू कर सकता है?
- रिंगाल आधारित शिल्प : उत्तराखण्ड का एक परम्परागत कुटीर उद्योग
- कानिया के प्रेम में दीवानी सुबनी : लोककथा
- चीड़ की छाल को कलाकृतियों का रूप दे रहा एक कलाकार
- मेरी यादों का पहाड़ : एक बहुआयामी किताब
- पहाड़ की पुकार जो खींच ले गई मुझे
- ‘मनिला डांडे की देवी मां आज बहुत उदास है
- सोशियल इकोनॉमी ऑफ हिमालय : हिमालय की सामाजिक अर्थव्यवस्था का आरंभिक अकादमिक अध्ययन
- मानव और प्रकृति का संबंध प्राचीन, गहरा और अविभाज्य है
- न रुकदि छै, न थकदि छै, नयार जन बगदि छै : संकट में है नयार
- कर्ज पर युधिष्ठिर का जवाब : लोककथा
