तब बहुत निष्कपट हुआ करता था पहाड़ी जीवन
मेरा बचपन-3 (आखिरी क़िस्त) (डीडी पन्त की अप्रकाशित जीवनी के अंश पिछली कड़ी का लिंक : एक एसडीएम को देखकर मुझे खूब पढ़ने की इच्छा हुई -देवी दत्त पंत एक घटना याद आती है. मैं आठ या नौ साल का रहा हू... Read more
एक एसडीएम को देखकर खूब पढ़ने की इच्छा हुई
मेरा बचपन-2 (डीडी पन्त की अप्रकाशित जीवनी के अंश) -देवी दत्त पंत पिछली कड़ी का लिंक: बचपन में फलदार पेड़ों का आनंद कितनी मधुर याद आती है उस गुफा की जो शिखर चढ़ने पर रास्ते में मिलती थी. उसके अं... Read more
बचपन में फलदार पेड़ों का आनंद:
मेरा बचपन-1 (डीडी पन्त की अप्रकाशित जीवनी के अंश) -देवी दत्त पंत सुबह उठते ही कोलाहल, चिन्ता, अव्यवस्था, 70 वर्श के जीवन का यह आखिरी पड़ाव कैसा बीभत्स है! विज्ञान, तकनीक, समाजशास्त्र, नीतिशास... Read more
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