मेहनत से बनती है कड़ी ठेठ पहाड़ी बड़ी
उड़द की दाल को पीस ककड़ी या भुजे की बड़ी भी बनाई जाती. सारी तारीफ उड़द की दाल की सिलबट्टे में की गई पिसाई पर होती और फिर हाथ से की गई फिंटाई सोने में सुहागे जैसा फ़ैंटी उड़द पानी में डालने प... Read more
पिज्जा, बर्गर और फास्ट फूड के इस दौर में यदि उत्तराखण्ड के परम्परागत व्यंजनों की बात करें तो आधुनिक पीढ़ी को ताज्जुब नहीं होना चाहिये कि उस दौर में रिश्तेदारी में जाने के लिए भी ये ही पकवान... Read more
बड़े-बड़े गुण वाला बड़ी का साग
हिमाचल वाला किस्सा यहां भी दोहराया गया. फर्क सिर्फ ये है कि शिमला में शर्मा जी थे और यहां हल्द्वानी में वर्मा जी. आउटगोइंग गर्मी, इनकमिंग बरसात के दिनों में एक दिन शर्मा जी रात को शिमला के प... Read more
सैणी हो या मैंस, सबकी पसंद चैंस
चैंस कह लो, चैंसा या फिर चैंसू. नाम अलग-अलग अंचलों में कुछ फर्क के साथ अलग हों, लेकिन इसका स्वाद अस्कोट से बड़कोट तक पूरे उत्तराखंड में एक जैसा मिलेगा. थोड़ा उड़द की दाल का लसलसापन, कुछ इसको... Read more
बचपन के उन दिनों गांव से आने वाला कोई परिजन या अन्य ग्रामीण जब घर से आई समौण (सौगात) के तौर पर एक-दो पोटलियां मां के हाथ में सौंपता था तो हमारी निगाह उसके अंदर अखरोट, च्यूड़े, नारंगी और माल्... Read more
अद्वितीय होता है कुमाऊं-गढ़वाल का झोई भात
वो कढ़ती है, ये झोलती है: पहाड़ की झोली 15 साल की उम्र में पहली बार जब गांव में एक महीने से अधिक रहने का सुयोग प्राप्त हुआ तो बोडी ( ताई के लिए गढ़वाली संबोधन) दोपहर के भोजन में रोज झोली यानी... Read more
पहाड़ी मूले का थेचुवा खाइए जनाब, पेटसफा चूरन नहीं
कल सुबह सब्जी लेने मंडी में पहुंचा तो देखा कि पहाड़ी मूला/ मूली बाजार में आ चुका है. अभी बाजार में नया-नया है तो दाम के मामले में खूब इतरा-इठला रहा है. दुकानदार एक रुपया भी कम करने को त... Read more
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