‘मेरा भी कोई होता’ एक सीधी-सादी पहाड़न की कहानी
आग जलाने के लिए चूल्हे में फूंक मार-मारकर सुशीला की आंखें लाल हो गई थीं. कमरा धुएं से भर गया था. धुएं से उसकी आंखें चूने लगी थीं. सुशीला ने खीझ के कारण जोर से फूंक मारी, आग ‘धप्प’ से जल उठी.... Read more
त्रेपन सिंह चौहान की पहली पुण्यतिथि है आज
मित्र, त्रेपन सिंह चौहान की छवि मेरे मन-मस्तिष्क में ‘विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार हावर्ड फास्ट के नायक ‘स्पार्टकस’ की तरह है जो कि सामाजिक-राजनैतिक सत्ता के अन्याय के विरुद्ध हमेशा आन्दोलित रह... Read more
सलाम त्रेपनदा! हरदम दिलों में रहोगे जिंदा
21 सितंबर 2014 को रविवार का वो दिन मेरे सांथ ही नागरिक मंच के सांथियों के लिए काफी चहल-पहल भरा था. साल में सितंबर के बाद महिने में किसी रविवार को मंच, अपने-अपने क्षेत्र में समाज के लिए निस्व... Read more
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