यात्रा जारी रहेगी इस्तानबूल से कहानी उन पश्चिमी यायावर युवकों की शुरू होती है जो कि योरोप एवं अमेरिका के उस समाज से, जिसके प्रति उन्हें आक्रोश है, अपने आक्रोश को मिटाने के लिए हिमालय के उस छ... Read more
जोर्डन अकबा में बहुत से भारतीय एवं पाकिस्तानी कार्य करते हैं. इन सभी का काम बंदरगाह में पानी के जहाजों में सामान उतारना व चढ़ाना होता है. सभी इसी आशा के साथ कार्य करते हैं किसी मालवाही जहाज म... Read more
डमास्कस में किस्मत के सितारे आज कुछ बुलंद लग रहे थे. लिफ्ट के लिए हमें इंतजार नहीं करना पड़ा. 25’००० सीरियन पाउण्ड की एक चमचमाती नई कार में हमें शीध्र ही लिफ्ट मिल गई. 100 से 120 किमी प... Read more
तुर्की की रेल में हिंदी का गीत तेहरान से आगे की यात्रा रोचक रही. तेहरान से इस्ताम्बुल तक का रेलवे मार्ग विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है. कभी रेल बर्फीले रेगिस्तान से... Read more
पश्चिम की यह युवा पीढ़ी दूसरे दिन हम कंधार शहर देखने निकले. चारों और पिश्चमी देशों के चरस के शौकीन दिखायी दिये. कंधार के रेस्तराओं में पाश्चात्य संगीत एवं अफगानी चरस के बीच ये लोग आलौकिक आनंद... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 9
पिछली कड़ी अंधेरा घिरने लगा तो वापस गांव के ठिकाने को चले. तब सायद पांच परिवार ही मिलम में प्रवास पर आए थे. पहले मुनस्यारी के ल्वां, बिल्जू, टोला, मिलम, मर्तोली, बुर्फु, मापा, रेलकोट, छिलास आ... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 8
पिछली कड़ी मौसम को करवट बदलते देख वापस हो लिए. मर्तोली गांव की गलियों में भटकने लगे. जिन गलियों में कभी बच्चे चहकते होंगे वो गलियां सूनसान सोयी हुवी सी महसूस हुवी. 200 मवासों का गांव आज सूनसा... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 7
पिछली कड़ी सुबह बारिश ने जोर पकड़ लिया था. बारिश रूकने का इंतजार करने लगे. लखनऊ की ज्योलोजिकल सर्वे आफ इंडिया की टीम भी बगल में ही रूकी थी. दो माह मिलम ग्लेशियर में शोध करने के बाद अभी वो नीच... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 6
पिछली क़िस्त का लिंक – जोहार घाटी का सफ़र – 5 मुनस्यारी को जोहार घाटी का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है. मुनस्यारी तिब्बत जाने का काफी पुराना रास्ता है. उस वक्त जब तिब्बत से व्यापार होता था... Read more
जोहार घाटी का सफ़र भाग – 5
पिछली क़िस्त का लिंक – जोहार घाटी का सफ़र -4 ‘मामा अब नहीं आएंगे हम ट्रैकिंग में… ! मिलम गांव से मुनस्यारी को वापस आते वक्त नितिन के ये शब्द मुझे मुनस्यारी पहुंचने तक कचोटते रहे. ऐ... Read more
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