पहाड़ और मेरा जीवन – 30 मैं बचपन से ही थोड़ा बेपरवाह मगर बहुत स्वाभिमानी रहा हूं. बचपन में मैं रोता कम ही था. लेकिन एक-दो बार मैं जब रोया तो बहुत गजब तरीके से रोया. एक बार तो मैं मां से किसी... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन –29 हमारे परिवार के जम्मू से ठूलीगाड़ आने की वजह पिताजी थे, जिन्होंने फौज में अफसर बनने के सात असफल प्रयासों के बाद अपना मानसिक संतुलन खो दिया था. पिथौरागढ़ में जब मां काल... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन –28 पहाड़ों में गुजरे बचपन के दिनों को याद करते हुए इधर दो बातें हुईं. पहली यह कि मैंने छत्तीस साल के बाद पहली बार अपनी सातवीं क्लास की एक सहपाठी कविता पांडे से बात की. उस... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन –27 मैं आप लोगों को इस बार केंद्रीय विद्यालय पिथौरागढ़ का किस्सा सुनाने जा रहा हूं. उन दिनों मैं कक्षा सात में पढ़ता था. जैसा कि मैंने आपको पहले बताया था कि कैसे एक रात मे... Read more
इसलिए मैं हरीश बम उर्फ हरसू का आज भी कायल हूं
पहाड़ और मेरा जीवन – 26 ठूलीगाड़ में गुजारे दिनों की बात चल रही है, तो किस्से पर किस्से याद आ रहे हैं. पिछले सप्ताह आपने बूबू के रेडियो के बारे में पढ़ा. इस बार भी मैं बूबू से जुड़ी हुई कुछ... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 25 ठूलीगाड़ में मैं चौथी कक्षा में आया था और सातवीं करने के बाद एक साल के लिए राजस्थान चला गया. जहां देवली नामक जगह से मैंने आठवीं कक्षा पास की. वहां फर्श पर टाट बिछाकर... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 24 (पोस्ट को लेखक सुन्दर चंद ठाकुर की आवाज में सुनने के लिये प्लेयर के लोड होने की प्रतीक्षा करें.) जिसने पहाड़ में रहकर कभी चूल्हे में तांबे के गुड़तोलों में बना भात-दा... Read more
जब संजु वडके की अफसरों के बच्चों वाली साइकिल मैंने डोट्याल की टांगों के बीच घुसाई
पहाड़ और मेरा जीवन – 23 जैसा कि मैंने पिछली किस्त में आपको अपने दोस्त संजु वडके के बारे में बताया था कि उसके साथ रहकर मैंने बहुत कुछ सीखा. अगर वह मेरा दोस्त न बनता, तो मेरा आत्मविश्वास उस तर... Read more
पहाड़ और मेरा जीवन – 21 (पोस्ट को लेखक सुन्दर चंद ठाकुर की आवाज में सुनने के लिये प्लेयर के लोड होने की प्रतीक्षा करें.) जौं की ताल का मैं आप लोगों को आखिरी किस्सा बताने जा रहा हूं. आख... Read more
आख़िर किस मिट्टी के बने होते हैं कमान्डो
2008 के मुम्बई हमले के बाद हमारे साथी और वरिष्ठ पत्रकार-सम्पादक सुंदर चंद ठाकुर ने अपने एक कमांडो मित्र पर यह लेख लिखा था. यह बताना अप्रांसगिक नहीं होगा कि सुंदर चंद ठाकुर स्वयं एक फौजी रह च... Read more
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