शैलेश मटियानी की कहानी ‘लाटी’
Posted By: Kafal Treeon:
लाटी अपने वरुण विलाप की मर्मवेधी चीत्कारों से इर्दगिर्द जुटे लोगों को ऐसे झकझोर रही थी, जैसे कोई अचानक बाढ़ पर आई नदी अपने प्रचण्ड प्रवाह से दोनों किनारे खड़ी फसलों को झकझोर रही हो. उसने गूं... Read more
अर्धांगिनी : छुट्टी में पहाड़ आये फ़ौजी का घर-संसार लपेटे शैलेश मटियानी की कहानी
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टिकटघर से आखिरी बस जा चुकने की सूचना दो बार दी जा चुकने के बावजूद नैनसिंह के पाँव अपनी ही जगह जमे रह गए. सामान आँखों की पहुँच में सामने अहाते की दीवार पर रखा था. नज़र पड़ते ही, सामान भी जैसे... Read more
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