‘प्रेमचंद घर में’ – पुण्यतिथि विशेष
Posted By: Girish Lohanion:
आज प्रेमचंद पुण्यतिथि के अवसर पर पढ़िये ‘प्रेमचंद घर ‘ में का एक अंश : मैं गाती थी, वह रोते थे शिवरानी देवी बंबई में एक रात बुखार चढ़ा तो दूसरे दिन भी पांच बजे तक बुखार नहीं उतर... Read more
प्रेमचंद के फटे जूते
Posted By: Girish Lohanion:
प्रेमचंद का एक चित्र मेरे सामने है, पत्नी के साथ फोटो खिंचा रहे हैं. सिर पर किसी मोटे कपड़े की टोपी, कुरता और धोती पहने हैं. कनपटी चिपकी है, गालों की हड्डियां उभर आई हैं, पर घनी मूंछें... Read more
पचास साल पहले इलाहाबाद में कथाकार अशोक कंडवाल के साथ: प्रेमचंद और उनके बेटे की स्मृतियां
Posted By: Kafal Treeon:
अपनी जिंदगी के किसी पुराने टुकड़े को एकदम जीवंत रूप में देखना कितना रोमांचकारी होता है, इसका अहसास मुझे कुछ ही देर पहले तब हुआ जब मुझे पुराने किताबों के ढेर में ‘नई कहानियाँ’ का जनवरी, 1969... Read more
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