एक थे कैप्टन धूम सिंह चौहान
बचपन से लेकर जवानी के दिनो तक हम गौचर कस्बे को मेले के लिए जानते थे. गौचर-पानाई का समतल, सेरे (तलाऊ जमीन), विद्यालयी शिक्षा बोर्ड परीक्षा का मूल्यांकन केन्द्र, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्... Read more
मंगलू जागर्या : नंदकिशोर हटवाल का नाटक जो परम्पराओं को विज्ञान की कसौटी पर परखता है
उत्तराखंड के गढ़वाल व कुमाऊं अंचल में जागर एक महत्वपूर्ण विधा है, गीत-संगीत और लोकनृत्य की. लोक ऐतिहासिक सामग्री के रूप में भी ये बहुमूल्य हैं. जागर, देवताओं से सम्बंधित होते हैं या देवत्व-प... Read more
दीपावली के ठीक ग्यारह दिन बाद गढ़वाल में एक और दीपावली मनाई जाती है जिसे इगास बग्वाल कहा जाता है. इस दिन पूर्व की दो बग्वालों की तरह पकवान बनाए जाते हैं, गोवंश को पींडा (पौस्टिक आहार) दिया ज... Read more
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