कृष्णा सोबती की कहानी ‘सिक्का बदल गया’
Posted By: Kafal Treeon:
खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुंची तो पौ फट रही थी. दूर-दूर आसमान के परदे पर लालिमा फैलती जा रही थी. शाहनी ने कपड़े उतारकर एक ओर रक्खे और ‘श्रीराम, श्... Read more
चराग़-ए-राह बुझा क्या कि रहनुमा भी गया हवा के साथ मुसाफ़िर का नक़्श-ए-पा भी गया – परवीन शाक़िर -‘सर आई हैव स्टडीड ऑलमोस्ट एव्री एस्पेक्ट ऑफ वीमेन एम्पावरमेंट एंड आई फील कम्फर्टेबल... Read more
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