ज्ञानरंजन की कहानी ‘छलांग’
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श्रीमती ज्वेल जब यहाँ आकर बसीं तो लगा कि मैं, एकबारगी और एकतरफा, उनसे फँस गया हूँ और उन्हें छोड़ नहीं सकता. एक गंभीर शुरुआत लगती थी और यह बात यूँ सच मालूम पड़ी कि दूसरे साथियों की तरह, मैं ल... Read more
नई कहानी के नए प्रेरक : शैलेश मटियानी और ज्ञानरंजन
Posted By: Kafal Treeon:
इतने बड़े हिंदी समाज में सिर्फ डेढ़ यार : तेरहवीं क़िस्त 1966 में नैनीताल से इलाहाबाद के लिए रवाना हुआ तो मैं एक तरह से हवा में यात्रा कर रहा था. क्यों यात्रा कर रहा हूँ, यह तो मालूम था, मगर कह... Read more
बयासी के हुए आज ज्ञानरंजन
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आज हिन्दी की सबसे महत्वपूर्ण पत्रिका ‘पहल’ के यशस्वी सम्पादक और महान कथाकार ज्ञान जी का जन्मदिन है. आज ज्ञान जी ने बयासी साल पूरे कर लिए. अपने से बहुत छोटी आयु वालों के साथ कैसा... Read more
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