धनतेरस पर सिर्फ ढोल दमाउँ और मसकबीन खरीदने वाले इस पहाड़ी परिवार का कौन दीवाना न हो जाए
रक्षा अनुसंधान संस्थान देहरादून में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत डी पी त्रिपाठी का शौक अलग है, सपने भी और सपनों को अमली जामा पहनाने का अंदाज़ भी. तभी तो वो धनतेरस के दिन देहरादून से श्रीनगर जा... Read more
पाण्डवाज़ का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू
[एक ऐसे समय में जब कुमाऊँ-गढ़वाल का लोकसंगीत संभवतः अपने सबसे बुरे और बेसुरे दौर से गुज़र रहा था, ताज़ा हवा के एक झोंके की तरह ‘पाण्डवाज़’ नामक संगीत समूह ने प्रवेश किया और अपनी प्रोडक्शन-गुणवत्... Read more
सरयू आज भी सिसकती है – कुसुमा की त्रासद लोककथा
सुसाट मन को कपोरता है. लग जाता है एक उदेख जिसके अंदर कुहरा जाती है बाली कुसुमा की ओसिल कहानी. सरयू आज भी सिसकती है. इतना तो समय बीत गया. विदित नहीं अब देवराम और सरूली दीदी जीवित होंगे भी कि... Read more
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