कहो देबी, कथा कहो – 5
पिछली कड़ी साहित्य की प्रयोगशाला नैनीताल मेरे लिए साहित्य की प्रयोगशाला भी रहा जहां मैंने साहित्य की बारहखड़ी लिखी और पढ़ी. गांव से दूर सपनों के शहर में पढ़ने के लिए जरूर चला आया था लेकिन पढ़ते-ल... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 4
पिछली कड़ी नवीन और मैंने एन सी सी भी ले ली. एन सी सी की अपनी प्लाटून की परेड के दौरान एक दिन सावधान!…विश्राम! के बाद सुस्ताते समय एक कैडेट ने धीरे से पूछा, “तुम देवेन एकाकी हो?” मैंने उ... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 3
पिछली कड़ी वह पहली उड़ान मैंने आत्म निर्भर बनने के लिए अपनी पहली उड़ान भरी. रहने की जगह खोजने के लिए अपने सहपाठियों के साथ बात करनी शुरू कर दी ताकि जाड़ों की छुट्टियों के बाद डेरा बदल सकूं. हरीश... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 2
पिछली कड़ी वे संगी-साथी हां तो सुनो, कक्षा में मेरे एक-दो दोस्त बन गए, लेकिन निवास पर मैं अलग-थलग-सा पड़ गया. भीतर के कमरे के सीनियर कुछ अलग जैसे रहते थे. उनके और मेरे कमरे के बीच कांच लगी एक... Read more
कहो देबी, कथा कहो – 1
[वरिष्ठ लेखक देवेन्द्र मेवाड़ी के संस्मरण और यात्रा वृत्तान्त आप काफल ट्री पर लगातार पढ़ते रहे हैं. पहाड़ पर बिताए अपने बचपन को उन्होंने अपनी चर्चित किताब ‘मेरी यादों का पहाड़’ में ब... Read more
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – अन्तिम हिस्सा
(पिछली क़िस्त – दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 3) तभी, शेखर ने सामने उगी लैंटाना यानी कुरी की झाड़ी पर से उसके नन्हे, रंग-बिरंगे फूलों का छोटा-सा गुच्छा तोड़ा और आकर मेरी वास्कट की जेब पर सजात... Read more
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 4
(पिछली क़िस्त – दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 3) हम बातें करते-करते उतरते रहे. गीता महिला समाख्या की जिला निदेशक हैं. उन्होंने नैनीताल जिले के विभिन्न इलाकों में महिलाओं की स्थिति के बारे म... Read more
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 4
(पिछली क़िस्त – दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 3) मैं दूकानों से थोड़ा आगे निकला और नीचे जंगल की ढलान की ओर देखा. वह प्लास्टिक के कचरे से अटा पड़ा था. दूकानों के आगे साफ सड़क और उनके पिछवाड़े इत... Read more
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 3
(पिछली क़िस्त – दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 2) कहे अनुसार सुबह ठीक छह बजे परशु गिलास भर कर चाय दे गया. मैं छत पर गया तो देखा, चारों ओर पहाड़ों पर सुनहरी धूप खिल रही थी. पीछे बहुत बड़े मैदान... Read more
दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 2
(पिछली क़िस्त – दिल्ली से तुंगनाथ वाया नागनाथ – 1) गडोलिया गांव से निकलते समय बांध के पानी के उस पार देखा. वहां पहाड़ की गोद में खंडहर हुआ गांव उभर आया था. माचिस के डिब्बों जैसे टूटे मका... Read more
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