बड़े अच्छे लगते हैं : खास मौके पर आने वाले कल के बिछोह को लेकर रचा गया गीत
बड़े अच्छे लगते हैं, ये धरती, ये नदिया, ये रैनाऔर? और तुम... - २ओ माझी रे, जइयो पिया के देस हम तुम कितने पास हैं कितने दूर हैं चाँद सितारे सच पूछो तो मन को झूठे लगते हैं ये सारे - २मगर सच्... Read more
साहिर लुधियानवी का गीत जिसमें मोहब्बत जैसे नाजुक विषय पर खुलेआम शास्त्रार्थ है
हर तरफ हुस्न है, जवानी है,आज की रात क्या सुहानी हैरेशमी जिस्म थरथराते हैं,मर्मरी ख्वाब गुनगुनाते हैंधड़कनों में सुरूर फैला है,रंग नज़दीक-ओ-दूर फैला हैदावत-ए-इश्क दे रही है फज़ा,आज हो जा किसी... Read more
1955-56 की एक काव्य संध्या में देव साहब ने नीरज को सुना. उनकी कविता उन्हें इतनी भायी कि उन्होंने नीरज के सामने सीधे प्रस्ताव रख डाला, अगर कभी फिल्मी गीत लिखने का मन हो, तो मैं आपके साथ काम क... Read more
एक हिन्दी भाषी अफसर की दक्षिण भारत यात्रा के बहाने वास्कोडिगामा और अगस्त्य मुनि के किस्से
तटस्थता और पारदर्शिता, किसी भी व्यवस्था के सबसे लोकप्रिय सिद्धांत माने जाते है, जिसके चलते अक्सर चुनाव जैसे खास आयोजनों में उत्तर के लोगों को दक्षिण, दक्षिण के लोगों को पूरब, तो पश्चिम के लो... Read more
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