अपनी बोली के शब्दों को पीछे धकेलते पहाड़ी
अपनी पृथक पहचान के लिए सृजित पृथक उत्तराखण्ड राज्य के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले पहाड़ी जनमानस में आज स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है कि क्या मात्र प्रशासनिक एंव विधायी शक्तियों के विकेन... Read more
सदेई : भाई-बहिन के निश्छल प्रेम की अमर गाथा
गढ़वाल में चैत के महीने गायी जाने वाली चैती गाथाओं में सदेई का विशिष्ट स्थान है. सदेई की गाथा में दाम्पत्य-प्रेम या परकीया प्रेम का कोई प्रसंग नहीं है. ये गाथा पूरी तरह सहोदर भाई-बहिन के पवि... Read more
साल नया है, चक्कर पुराना
लो, अपनी पृथ्वी ने एक और चक्कर पूरा कर लिया है. वैसे ये चक्कर साल के किसी भी दिन पूरा हो सकता है. पर गिनने की आदत पहली जनवरी से हो गयी है तो लगता है कि पिछली रात के ठीक 12 बजे ही ये चक्कर पू... Read more
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