ओएशडी सैप कह लो चाहे निजी शचिव कह लो – नीश हर जगह होने वाले हुए उत्राखंड में
उसने अपनी फुलौड़ी नाक को ज़रा सा टेढ़ीयाया और बोला- ‘वरफ़ारी हो रई वरफ़ारी’ (Personal Secretaries of Modern Politicians Satire) -`क्या’ -`अए वरफ़ारी सुरु हो गई… इश्नो... Read more
इस भुस्कैट हो चले विवाद से बेहतर है हम भाषा के मुद्दे को एक अलहदा तरीके से समझने की कोशिश करें. मुझे लगता है सबसे सशक्त भाषा वही है जिसमें किसी मुसीबत में फंसा आदमी अपनी जान बचाने के लिए किस... Read more
कल्पनीय सच का विधान : चंदन पांडेय के उपन्यास ‘वैधानिक गल्प’ के बहाने ‘आज’ से जिरह
सबकुछ सायास है वैधानिक गल्प में. उसके इस तरह से होने पर बहस होनी चाहिए क्योंकि जान बूझकर किसी घटना, व्यक्ति या विचारधारा को उजागर करने के उद्देश्य के लिए बुनी गयी चीज़ में वो मात्रा सबसे निर... Read more
काफल ट्री के पाठक अमित श्रीवास्तव के नाम परिचित हैं. पुलिस विभाग में काम करने वाले अमित की छवि काफल ट्री के पाठकों के बीच एक संजीदा लेखक की हैं. उनकी ईमानदारी लेखनी को पाठकों ने हमेशा खूब प्... Read more
बार बार तारीख को बदला है छात्रों ने
फरवरी का पहला दिन था. साल उन्नीस सौ साठ. सत्रह से उन्नीस बरस के चार लड़के अमरीका के उत्तरी कैरोलिना के ग्रीन्सबोरो शहर के एक रेस्टोरेंट ‘वूल्सवर्थ लंच काउन्टर’ में आए और खाना माँ... Read more
इट इज़ नॉट ब्लाइंडनेस इट्स अ ब्लाइंडफ़ोल्ड
रिटायर होने के तीन माह पूर्व उनसे एक अनौपचारिक बातचीत थी. – अब तक कितने? – एक भी नहीं – कभी लगा नहीं कि इस क्रिमिनल को उड़ा दिया जाए? – बहुत सालों,... Read more
अपनी निगाह पर भी निगाह रखिये
आईपीसी में अपना बचाव करने का अधिकार है, न कर पाने का ‘अपराध’ नहीं है. कोई धारा नहीं जिसमें सेल्फ डिफेंस न कर पाने पर आपको सज़ा का प्रावधान हो. क्यों? क्योंकि अपराध को रोकने और अप... Read more
संविधान दिवस पर एक सरकारी सेवक कम लेखक का आत्मालाप
लिखना अपने होने को तस्दीक करना है Constitution Day Special Amit Srivastava हम क्यों लिखते हैं इससे पहले ये जानना ज़रूरी है कि वो क्या है जो हमें लिखने से रोकता है. कोई नियम, कोई क़ानून, कोड... Read more
सरलता जो सहजता में तरमीम होती है
संतोष कुमार तिवारी के काव्य संकलन ‘अपने-अपने दंडकारण्य’ पर एक संक्षिप्त टिप्पणी (Review of Santosh Kumar Tiwari Book Amit Srivastava) कवि का ये दूसरा काव्य-संग्रह है जिसमें जीवन की विविध भाव... Read more
गैरसैण एक शब्द है राजकोष का
गैरसैण एक शब्द है पानी की बची हुई बूंद को छाल की शिराओं में सँजोकर हरा होना सीखा था इसने खिलना सीखा था अब जब नाखून के पोर लाल हो उठे थे किसने देखा कि इसके हाथों में निचुड़े हुए बुरांश के फूल... Read more
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